नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ताजा रिपोर्ट में सामने आया है कि ऋण पर ब्याज दरों में कटौती का लाभ ग्राहकों तक पहुंचाने के मामले में विदेशी बैंक सरकारी और निजी बैंकों से आगे रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार विदेशी बैंकों ने ऋण की ब्याज दरों में एक प्रतिशत से अधिक की कमी की, जबकि सरकारी और निजी बैंकों ने अपेक्षाकृत कम कटौती की।
आरबीआई के विश्लेषण के अनुसार, नीतिगत ब्याज दरों में बदलाव के बाद विदेशी बैंकों ने अपने ग्राहकों की मासिक किस्त (ईएमआई) कम करने में अधिक तेजी दिखाई। इसके विपरीत सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के कई बैंकों में ब्याज दरों में कमी की गति अपेक्षाकृत धीमी रही।
विशेषज्ञों का मानना है कि जिन ग्राहकों के ऋण परिवर्तनीय ब्याज दर (फ्लोटिंग रेट) पर आधारित हैं, उन्हें ब्याज दरों में कटौती का सीधा लाभ मासिक किस्त कम होने या ऋण अवधि घटने के रूप में मिल सकता है। हालांकि यह लाभ प्रत्येक बैंक की आंतरिक नीति और ऋण के प्रकार पर भी निर्भर करता है।
आरबीआई का मानना है कि बैंकों द्वारा नीतिगत ब्याज दरों में बदलाव का लाभ समय पर ग्राहकों तक पहुंचना बैंकिंग प्रणाली की प्रभावशीलता के लिए महत्वपूर्ण है। इससे ऋण लेने वालों पर वित्तीय बोझ कम होता है और अर्थव्यवस्था में मांग को भी समर्थन मिलता है।
रिपोर्ट के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि सरकारी और निजी बैंक भी प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के लिए ब्याज दरों में कटौती का लाभ ग्राहकों तक अधिक तेजी से पहुंचाने पर ध्यान देंगे।

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