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इंदौर की आवाज़ कौन उठाएगा? ताई और भाई बोले, बाकी जनप्रतिनिधि क्यों मौन हैं?

 


प्रणव बजाज


मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी कहलाने वाला इंदौर आज विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर ठहराव का सामना कर रहा है। आश्चर्य की बात यह है कि शहर का प्रतिनिधित्व करने वाले अधिकांश जनप्रतिनिधि सार्वजनिक रूप से इन मुद्दों पर मुखर नहीं दिख रहे। ऐसे समय में भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन (ताई) ने मुख्यमंत्री को अलग-अलग पत्र लिखकर इंदौर के अटके विकास कार्यों पर चिंता जताई है



राजनीतिक रूप से दोनों नेताओं के बीच वर्षों तक मतभेद चर्चा का विषय रहे, लेकिन इंदौर के हितों के प्रश्न पर दोनों एक स्वर में दिखाई दिए। यह संदेश भी देता है कि शहर का विकास दलगत राजनीति से ऊपर होना चाहिए।


विकास के कई अहम काम अधर में


इंदौर का मास्टर प्लान वर्ष 2021 में समाप्त हो गया, लेकिन अब तक नया मास्टर प्लान लागू नहीं हो सका। शहर के विकास की दिशा तय करने वाला यह सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज वर्षों से लंबित है।


इसी तरह नगर एवं ग्राम निवेश से जुड़े कई निर्णय अटके हैं। नगर निगम में एल्डरमैन की नियुक्ति नहीं हुई, विकास प्राधिकरण को भी स्थायी नेतृत्व नहीं मिल पाया। नए रेलवे स्टेशन की परियोजना धीमी पड़ गई है और इंदौर को नई ट्रेनों का लाभ भी अपेक्षा के अनुरूप नहीं मिला।


सिंहस्थ से जुड़े विकास कार्यों के लिए भी इंदौर को अपेक्षित बजट नहीं मिलने की चर्चा है। वहीं एयरपोर्ट विस्तार के लिए आवश्यक भूमि उपलब्ध कराने का मामला भी लंबे समय से लंबित है।


पत्रों में उठाए गए सवाल


कैलाश विजयवर्गीय ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा कि इंदौर को उसके विकास के अनुरूप प्राथमिकता नहीं मिल रही। उन्होंने मास्टर प्लान में देरी, महानगरीय क्षेत्र की अधिसूचना तथा अन्य लंबित परियोजनाओं पर सवाल उठाए।


दूसरी ओर सुमित्रा महाजन ने रेलवे परियोजनाओं और एयरपोर्ट विस्तार को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है मानो इंदौर की उपेक्षा की जा रही हो। उन्होंने रेलवे से स्वीकृत ट्रेनों का संचालन शुरू करने और एयरपोर्ट विस्तार के लिए भूमि उपलब्ध कराने की मांग की।


सबसे बड़ा सवाल


इंदौर से कई विधायक, सांसद और महापौर सभी सत्तारूढ़ दल से जुड़े हैं। ऐसे में प्रश्न उठता है कि यदि वरिष्ठ नेताओं को सार्वजनिक रूप से पत्र लिखकर शहर के विकास की मांग करनी पड़ रही है, तो बाकी जनप्रतिनिधि इन मुद्दों पर सामूहिक रूप से आवाज़ क्यों नहीं उठा रहे?


संपादकीय दृष्टिकोण


इंदौर केवल मध्य प्रदेश का सबसे स्वच्छ शहर ही नहीं, बल्कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था का प्रमुख इंजन भी है। यदि मास्टर प्लान, रेलवे, एयरपोर्ट और आधारभूत संरचना जैसी परियोजनाएं वर्षों तक लंबित रहती हैं, तो इसका असर भविष्य के निवेश, रोजगार और शहरी विकास पर पड़ेगा।


यह समय राजनीतिक श्रेय लेने का नहीं, बल्कि सामूहिक जिम्मेदारी निभाने का है। शहर के सभी जनप्रतिनिधियों को दलगत सीमाओं से ऊपर उठकर इंदौर के लंबित विकास कार्यों के लिए एकजुट प्रयास करना चाहिए। जनता का सवाल भी यही है—क्या इंदौर की आवाज़ केवल "ताई" और "भाई" ही उठाएंगे, या पूरा जनप्रतिनिधि तंत्र भी आगे आएगा?

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