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महाराष्ट्र सरकार का बड़ा फैसला: एमबीबीएस स्नातकों के लिए एक वर्ष का अनिवार्य सेवा बॉन्ड समाप्त

 


मुंबई। परिक्षित गुप्ता


 महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के मेडिकल कॉलेजों से एमबीबीएस करने वाले छात्रों के लिए लागू एक वर्ष के अनिवार्य सेवा बॉन्ड (सामाजिक उत्तरदायित्व सेवा) को समाप्त करने का निर्णय लिया है। सरकार का कहना है कि सरकारी पदों की सीमित उपलब्धता और हर वर्ष बड़ी संख्या में पास होने वाले डॉक्टरों के कारण यह व्यवस्था व्यावहारिक नहीं रह गई थी।



सरकार के अनुसार, मेडिकल कॉलेजों और एमबीबीएस स्नातकों की संख्या लगातार बढ़ी है, जबकि विभिन्न सरकारी विभागों में बॉन्ड सेवा के लिए उपलब्ध पद अपेक्षाकृत कम हैं। इस कारण अनेक डॉक्टरों को समय पर नियुक्ति नहीं मिल पाती थी और वे स्नातकोत्तर (पीजी) चिकित्सा पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए आवश्यक पात्रता समय पर पूरी नहीं कर पाते थे।


सरकारी आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि कई डॉक्टर केवल पीजी प्रवेश की औपचारिकता पूरी करने के उद्देश्य से बॉन्ड सेवा करते थे, जिससे सेवा की गुणवत्ता प्रभावित होती थी। साथ ही, नए स्नातकों को पर्याप्त व्यावहारिक अनुभव के बिना आपातकालीन सेवाओं में नियुक्त करना भी चुनौतीपूर्ण माना गया।


नए नियम क्या हैं?


सरकार के नए निर्णय के अनुसार—


जिन डॉक्टरों ने सरकारी आदेश जारी होने से पहले अपनी आवंटित सेवा पर कार्यभार ग्रहण कर लिया है, उन्हें निर्धारित बॉन्ड अवधि पूरी करनी होगी।


जिन डॉक्टरों को अब तक कोई पद आवंटित नहीं हुआ है या आवंटन के बाद भी उन्होंने कार्यभार ग्रहण नहीं किया है, उन्हें बॉन्ड सेवा से पूर्ण छूट मिलेगी।


भविष्य में इस बॉन्ड के तहत कोई नई नियुक्ति नहीं की जाएगी और संबंधित ऑनलाइन पोर्टल भी बंद कर दिया जाएगा।


जिन अभ्यर्थियों ने पहले बॉन्ड से छूट पाने के लिए निर्धारित राशि जमा की थी, उन्हें धनवापसी नहीं मिलेगी।



रेजिडेंट डॉक्टरों ने किया स्वागत


महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स (मार्ड) ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे युवा डॉक्टरों के हित में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम बताया है। संगठन का कहना है कि इससे एमबीबीएस स्नातकों को बिना अनावश्यक देरी के पीजी शिक्षा और अपने चिकित्सा करियर में आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा।


हालांकि, संगठन ने सरकार से यह भी आग्रह किया है कि केवल मेडिकल सीटों की संख्या बढ़ाने के बजाय अस्पतालों, शिक्षकों, उपकरणों और स्वास्थ्य सेवाओं के बुनियादी ढांचे को भी समान प्राथमिकता दी जाए, ताकि चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता और मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार हो सके।

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