पुणे। संगठित अपराध अब केवल हथियारों और गुर्गों के भरोसे नहीं, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और एन्क्रिप्टेड डिजिटल तकनीकों का भी सहारा लेने लगा है। पुणे पुलिस की अपराध शाखा ने एक ऐसे कथित नेटवर्क का खुलासा किया है, जो लॉरेंस बिश्नोई गिरोह के नाम पर कारोबारियों और उद्योगपतियों से करोड़ों रुपये की उगाही के लिए एआई आधारित वॉयस कॉल, एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग और पहचान छिपाने वाली कॉलिंग तकनीक का इस्तेमाल कर रहा था।
क्या है पूरा मामला?
पुलिस के अनुसार, पिछले दो सप्ताह में पुणे के चार उद्योगपतियों को धमकी भरे कॉल और संदेश भेजकर ₹2 करोड़ से ₹50 करोड़ तक की उगाही मांगी गई। शिकायत मिलने के बाद अपराध शाखा ने जांच शुरू की और तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया, जबकि एक 17 वर्षीय नाबालिग को हिरासत में लिया गया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान पावन प्रकाशराम बराड़, सत्यप्रकाश कालूराम शिलोरा और रविकुमार राजेंद्रकुमार जांगड़ा के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, आरोपी फैक्ट्रियों में नौकरी की आड़ में उद्योगपतियों की गतिविधियों और आर्थिक स्थिति की जानकारी जुटाकर गिरोह तक पहुंचाते थे।
एआई से तैयार होती थी धमकी
जांच में सामने आया कि गिरोह धमकी भरे ऑडियो संदेश और फोन कॉल तैयार करने के लिए एआई आधारित वॉयस तकनीक का उपयोग कर रहा था। अधिकांश आरोपी मराठी नहीं जानते थे, लेकिन पीड़ितों को धाराप्रवाह मराठी में कॉल किए गए। पुलिस का मानना है कि यह एआई वॉयस क्लोनिंग तकनीक का परिणाम था, जिससे कॉल वास्तविक व्यक्ति की तरह प्रतीत होती थी।
डिजिटल पहचान छिपाने की कोशिश
पुलिस के मुताबिक, गिरोह ऐसे कॉलिंग एप का इस्तेमाल कर रहा था जो कॉल को विभिन्न देशों के सर्वरों के माध्यम से रूट करता था, जिससे वास्तविक स्रोत का पता लगाना कठिन हो जाता था। इसके अलावा आरोपी एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म का उपयोग कर आपस में संपर्क बनाए रखते थे, ताकि उनकी गतिविधियों का डिजिटल रिकॉर्ड आसानी से उपलब्ध न हो।
हथियार भी बरामद
जांच के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से तीन विदेशी पिस्तौल, दस कारतूस और कई मोबाइल फोन बरामद किए। पुलिस का आरोप है कि 18 जून को पुणे-सासवड रोड स्थित एक स्टील फैक्टरी के बाहर चार गोलियां चलाकर उद्योगपति को धमकाने की कोशिश भी की गई थी।
बिश्नोई नेटवर्क से कथित संबंध
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी आरजू बिश्नोई और फरार आरोपी शुभम लोणकर के संपर्क में थे। जांच एजेंसियां इस कथित नेटवर्क के अन्य सदस्यों, तकनीकी संचालन और एआई टूल के इस्तेमाल की भी जांच कर रही हैं। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।
बढ़ती चुनौती
यह मामला बताता है कि संगठित अपराध तेजी से आधुनिक तकनीक का उपयोग कर रहा है। एआई आधारित वॉयस क्लोनिंग, एन्क्रिप्टेड संचार और डिजिटल पहचान छिपाने वाले उपकरण कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए नई चुनौती बनते जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे अपराधों से निपटने के लिए साइबर फोरेंसिक क्षमता और एआई आधारित जांच तकनीकों को और मजबूत करना होगा।

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