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क्या इन्दौर खंडपीठ की समस्याओं पर होगी निर्णायक पहल?

क्या इन्दौर खंडपीठ की समस्याओं पर होगी निर्णायक पहल?

27 जुलाई को सफेद पट्टी बांधकर न्यायिक कार्य करेंगे अधिवक्ता, न्यायिक व्यवस्था की चुनौतियों पर उठाए गंभीर प्रश्न

इन्दौर, 24 जुलाई। न्याय तक समयबद्ध पहुँच प्रत्येक नागरिक का अधिकार मानी जाती है, किंतु यदि न्यायालयों में ही लंबित प्रकरणों का बढ़ता बोझ, न्यायाधीशों की कमी, सूचीबद्धता में विलंब और प्रशासनिक अव्यवस्थाएँ न्याय प्रक्रिया को प्रभावित करने लगें, तो यह केवल अधिवक्ताओं का नहीं बल्कि आम नागरिक और न्याय व्यवस्था—दोनों के लिए चिंता का विषय बन जाता है।

इन्हीं मुद्दों को लेकर उच्च न्यायालय अभिभाषक संघ, इन्दौर ने सोमवार, 27 जुलाई 2026 को हाथ पर सफेद पट्टी बांधकर न्यायिक कार्य करते हुए शांतिपूर्ण सांकेतिक विरोध दर्ज कराने का निर्णय लिया है। संघ का कहना है कि लंबे समय से चली आ रही अनेक समस्याओं के संबंध में माननीय कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश, उच्च न्यायालय, जबलपुर को विस्तृत प्रतिवेदन भी सौंपा जा चुका है, किंतु अब तक अपेक्षित समाधान नहीं हो सका है।

संघ द्वारा उठाए गए प्रमुख मुद्दों में इन्दौर खंडपीठ में न्यायाधीशों की अपर्याप्त संख्या, प्रकरणों की विलंबित सूचीबद्धता, त्वरित उल्लेख (Mentioning) में कठिनाइयाँ, प्रस्तुतीकरण शाखा की कार्यप्रणाली से जुड़ी समस्याएँ, जमानत प्रकरणों के निराकरण में विलंब तथा न्यायालय परिसर की पार्किंग व्यवस्था शामिल हैं।

इन परिस्थितियों में कई महत्वपूर्ण प्रश्न स्वतः खड़े होते हैं—

* क्या न्यायाधीशों की रिक्तियों का प्रभाव सीधे न्याय वितरण की गति पर पड़ रहा है?
* क्या सूचीबद्धता एवं मेंशनिंग की वर्तमान व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता है?
* क्या जमानत जैसे संवेदनशील मामलों में होने वाला विलंब न्याय के मूल सिद्धांतों को प्रभावित कर रहा है?
* क्या अधिवक्ताओं और न्यायालय प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की आवश्यकता है?
* और सबसे महत्वपूर्ण—इन समस्याओं का समाधान कब तक होगा?

उच्च न्यायालय अभिभाषक संघ के अध्यक्ष अधिवक्ता मनीष यादव ने सभी अधिवक्ताओं से इस सांकेतिक विरोध में सहभागी बनने का आह्वान करते हुए कहा है कि यह आंदोलन न्यायिक कार्य को बाधित करने के लिए नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था से जुड़े व्यावहारिक एवं प्रशासनिक मुद्दों की ओर सक्षम प्राधिकारियों का ध्यान आकर्षित करने के उद्देश्य से किया जा रहा है।

अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि अधिवक्ताओं द्वारा उठाई गई इन मांगों पर उच्च न्यायालय प्रशासन और संबंधित प्राधिकरण किस प्रकार एवं कितनी शीघ्रता से सकारात्मक पहल करते हैं। क्योंकि इन समस्याओं का समाधान केवल अधिवक्ताओं की सुविधा का प्रश्न नहीं, बल्कि लाखों न्यायार्थियों को समयबद्ध और प्रभावी न्याय उपलब्ध कराने से भी जुड़ा हुआ है।

— बौद्धिक प्रतिकार ब्यूरो, इन्दौर

स्रोत: उच्च न्यायालय अभिभाषक संघ, इन्दौर द्वारा जारी आधिकारिक सूचना।

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