दीप भांड
एक बेहद गंभीर विषय गलत हाथों में...
पेपर लीक को लेकर सरकार से नाराजगी तो बहुत है...यू NEET का पर्चा चंद रुपयों के लिए लीक हो जाना,यू जवाबदारों का जावाबदारी से भाग जाना, यू मुंह मोड़ लेना जैसे कुछ हुआ ही नहीं जैसे कहना कि अरे इसमें क्या नई बात है ये तो भारत में होते आया है और उस पर 22 मासूमों का बलि चढ़ जाना... सुनिये अब सवाल तो पूछा जाएगा और हाँ जवाब भी देना पड़ेगा...
ज्यादा नाराज़गी ये है कि पेपर वर्षों से लीक होते आए है आपको लाया ही इसलिए गया था कि अब यह सब रुक जाए और वो नहीं रुका और अब आपको इन काकरोचों को जवाब देना पड़ रहा है...ये काकरोच जिनका NEET से ज्यादा इंटरेस्ट मंच से हिंदू देवी देवताओं का उपमान करना है। पेपर लीक और देवी देवताओं का क्या संबंध, आप कीजिए ना आंदोलन एक आम न्यायप्रिय व्यक्ति आपसे जरूर जुड़ेगा किंतु ये काकरोच जैसे दिख रहे है वैसे है नहीं...
बस नाम रहेगा अल्लाह का...रहे बिल्कुल रहे अल्लाह का नाम पर बस अल्लाह का ही क्यों,आपको हिंदू देवी देवताओं से नफरत है किंतु अन्य आस्था की आप जय जयकार करे, यह स्वीकार नहीं है और वैसे विद्यार्थी आंदोलन में किसी भी ईश्वर,किसी भी धर्म का उपमान क्यों,इससे आपकी मंशा पर शंका होती है...यहां यह छात्र आंदोलन से कुछ अलग दिखता है...
हर बार आम विद्यार्थी,आम नागरिक ऐसे ही ठगा जाता है हर बार गंभीर विषयों को स्वार्थ सिद्धि के लिए कुछ लोग उसे हथिया लेते है।
इस बार इतना गंभीर मुद्दा उठाया तो किसने उठाया काकरोचों ने और ये होना ही था जब पुरुषार्थ से भरे सिंह अपनी आंखे मूंद ले तो काकरोच,गिद्ध,लकड़बग्घे,लोमड़ी ये सब परजीवी ऐसे ही हावी हो जाते है।
जब आंदोलन शुरू हुआ तो आप देखंगे शुरुआत कहा से हुई कुछ समलैंगिक युवाओ से,अब NEET और समलैंगिकता का क्या संबंध निश्चित रूप से वो किसी भी विषय पर बोल सकते है पर गंभीर विचारों पर बोलने से ज्यादा उन्हें अश्लीलत फैलाना है,भद्दे कपड़े,भद्दे इशारे,गंदे स्लोगन उपयोग करना है। आप समलैंगिक है यह आपका निजता का विषय है और उससे जुड़ी निजी गतिविधि आप अपने कमरे में करे ना कि यू सार्वजनिक स्थानों पर...
अब आंदोलन आगे बढ़ता है एक बहुत ही अच्छे सुलझे हुए राष्ट्रभक्त व्यक्ति न जाने कैसे एक ऐसे मंच को चुन लेते जिस पर तमाम हिन्दू विरोधी,राष्ट्रविरोधी तत्व नज़र आतें है। ऐसा मंच सोनम वांगचुक के लायक तो नहीं था...खैर ये अब सोनम जी जाने।
सरकार बस यहां चूक गई,मंच कोई भी हो सकता था किंतु यदि कोई इतना गंभीर राष्ट्रभक्ति व्यक्ति अगर कुछ बोल रहा था,अनशन पर बैठा था तो सरकार को उन्हें गंभीरता से लेते हुए तुरंत उन्हें सुनकर समाधान निकाला जाना चाहिए था उनकी बाते सुननी चाहिए थी।दुर्भाग्यवश यह किया नहीं गया।
आंदोलन को लेकर तरह तरह की बाते कही सुनी देखी जा रही है...तमाम वीडियो आ रहे है जिसमें कही आंदोलनकारियों की गलती तो कही पुलिस की गलती दिखती है...सच क्या झूठ क्या कैसे समझे.. एक आम व्यक्ति इस पूरे आंदोलन को बड़ी आसानी से समझ सकता है और वो उसे ऐसे समझे यदि किसी व्यक्ति का आचरण जानना हो उसके इरादे जानना हो तो उसके घर आने वाले मेहमानों को जान लेना चाहिए उस व्यक्ति का आचरण बड़ी आसानी से समझ आ जायेगा।अब आप भी इस आंदोलन में पहुंचने वाले उन मेहमानों को उन आंदोलनकारियों को देख लीजिए...वही घिसे पिटे हिंदू ,सनातन विरोधी लोग,वही उमर खालिद,शारजील इमाम से जुड़े लोग,वही JNU के ढपलीबाज,वही नफरती,हिंदू देवी देवताओं का मज़ाक बनाकर अभिव्यक्ति की आजादी का दुरुपयोग करने वाले वही चेहरे...स्वरा भास्कर,शबाना आजमी,प्रकाश राज,कुणाल कामरा...
ये कैसी भीड़ है ये कैसा आंदोलन है हमने बहुत आंदोलन देखे है पर किसी आंदोलन में यू देश के प्रधानमंत्री को माँ बहन की गालिया देना,भारतीय सेना को गली देना,लोकतंत्र को गालिया देना,सुरक्षा बलों के जवानों को घेर घेर कर मारना...ये हमने किसी आंदोलन में नहीं देखा।
यह सरकार की बहुत बड़ी त्रुटि है जो पहला तो यह कि पेपर लीक हुआ दूसरा यह कि एक आम विद्यार्थी को अब अपनी बात कहने के लिए इन काकरोचों पर निर्भर होना पड़ रहा है।होना यू चाहिए था NEET पेपर लीक को सरकार गंभीर तरीके से लेती और दोषियों पर ऐसी कार्यवाही करती कि वर्षों तक उस कार्यवाही के उदाहरण दिए जाते, होना यू चाहिए था कि छात्रों से सीधे संवाद किया जाता तो ये बिचौलिए इतने ताकतवर ना दिखाई पड़ते...अब एक आम विद्यार्थी अपनी व्यथा सुनाने के लिए इनके साथ खड़ा हो कर लाठिया खा भी रहा है मार भी रहा है।
हो सकता है ये पूरा आंदोलन खड़ा किया गया हो, हो सकता है विदेशी फंडिंग हो,हो सकता है सरकार गिराने का प्रयास हो,हो सकता है विपक्ष का किया धरा हो,हो सकता है इतने छात्र छात्राओं को बरगला कर लाया गया हो,हो सकता है सभी अराजक हो पर ध्यान रहे कम से कम उन दिवंगत 22 बच्चे और उनके अभिभावक भी उसी भीड़ में कही न्याय मांग रहे है ध्यान रहे कही आपकी लाठी उन्हें ना छू ले।
प्रधानमंत्री जी आपसे आग्रह है आप न्यायाधीश की भूमिका में है आप न्याय करे उन 22 बच्चों के साथ उन करोड़ो बच्चों के साथ जो आपसे उनके सुनहरे भविष्य की उम्मीद लगाए बैठे है। बस अब भ्रष्टाचार के कारण कोई और मृत्यु नहीं...समय है आप वो सूर्य किरण बने जो शिक्षा में भृष्टाचार रूपी अंधकार को चीर कर रख दे।
वंदे मातरम...
भारत माता की जय,भारतीय सेना की जय।
दीप भांड

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