नई दिल्ली। अवसाद (डिप्रेशन) को अक्सर केवल उदासी, निराशा या तनाव से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन कुछ मामलों में यह कहीं अधिक गंभीर रूप ले सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि किसी व्यक्ति को गहरी उदासी के साथ ऐसी आवाजें सुनाई दें जो वास्तव में मौजूद न हों, या भ्रम और गलत विश्वास होने लगें, तो यह साइकोटिक डिप्रेशन का संकेत हो सकता है।
यह स्थिति सामान्य डिप्रेशन से अलग होती है और इसमें अवसाद के साथ मनोविकृति (साइकोसिस) के लक्षण भी दिखाई देते हैं। ऐसे मरीजों को तत्काल मनोचिकित्सकीय मूल्यांकन और उपचार की आवश्यकता होती है।
साइकोटिक डिप्रेशन के प्रमुख लक्षण
लंबे समय तक गहरी उदासी या निराशा।
ऐसी आवाजें सुनाई देना जो वास्तव में मौजूद न हों।
ऐसे भ्रम या दृढ़ विश्वास होना जिनका वास्तविकता से संबंध न हो।
अत्यधिक अपराधबोध या स्वयं को बेकार समझना।
सामाजिक जीवन से दूरी बना लेना।
नींद और भूख में बदलाव।
गंभीर मामलों में स्वयं को नुकसान पहुंचाने के विचार आना।
किन कारणों से बढ़ सकता है खतरा?
लंबे समय तक गंभीर अवसाद।
मानसिक रोगों का पारिवारिक इतिहास।
अत्यधिक तनाव या आघातपूर्ण घटनाएं।
कुछ मामलों में मस्तिष्क से जुड़े जैविक कारण।
उपचार संभव है
विशेषज्ञों के अनुसार साइकोटिक डिप्रेशन का उपचार दवाओं, मनोचिकित्सकीय परामर्श और आवश्यकता पड़ने पर अन्य चिकित्सीय उपायों से किया जाता है। समय पर उपचार मिलने पर अधिकांश मरीजों में सुधार संभव है।
कब लें तुरंत चिकित्सकीय सलाह?
यदि किसी व्यक्ति को लगातार उदासी के साथ आवाजें सुनाई दें, भ्रम होने लगे, या स्वयं को नुकसान पहुंचाने जैसे विचार आने लगें, तो इसे सामान्य तनाव समझकर नजरअंदाज न करें। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत किसी मनोचिकित्सक या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए।

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