नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के चौथे दिन शिक्षा व्यवस्था और कथित पेपर लीक के मुद्दे पर सत्ता और विपक्ष आमने-सामने आ गए। विपक्ष ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर दोनों सदनों में जोरदार हंगामा किया, जबकि सरकार ने स्पष्ट कहा कि वह इस विषय पर चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है, लेकिन विपक्ष ही कार्यवाही नहीं चलने दे रहा।
संसद परिसर के मकर द्वार पर भी सरकार और विपक्ष के सांसदों ने अलग-अलग प्रदर्शन किए। विपक्षी सांसदों ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग दोहराई, वहीं सत्तापक्ष के सांसदों ने विपक्ष पर संसद की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाया।
सरकार का कहना है कि यदि विपक्ष के पास तथ्य और तर्क हैं तो उन्हें सदन में रखकर बहस करनी चाहिए। संसदीय लोकतंत्र में चर्चा ही समाधान का सबसे प्रभावी माध्यम है, न कि लगातार हंगामा कर सदन की कार्यवाही ठप करना।
दूसरी ओर विपक्ष का आरोप है कि पेपर लीक जैसी गंभीर घटनाओं पर सरकार जवाबदेही से बच रही है और मंत्री की नैतिक जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या संसद में इस मुद्दे पर सार्थक बहस होगी या फिर राजनीतिक टकराव के कारण संसद की कार्यवाही लगातार प्रभावित होती रहेगी। देश की जनता चाहती है कि शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषय पर आरोप-प्रत्यारोप के बजाय ठोस चर्चा हो और दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

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