आयकर अपीलीय अधिकरण का बड़ा फैसला, कर्मचारियों को मिली राह
नई दिल्ली। यदि किसी कंपनी ने कर्मचारी के वेतन से स्रोत पर कर कटौती (टीडीएस) तो कर ली, लेकिन उसे आयकर विभाग के पास जमा नहीं कराया, तो ऐसी स्थिति में कर्मचारी से उसी कर की दोबारा वसूली नहीं की जा सकती। आयकर अपीलीय अधिकरण (आईटीएटी) ने एक मामले में यह स्पष्ट करते हुए कर्मचारियों को महत्वपूर्ण राहत दी है।
आयकर अधिनियम की धारा 205 के अनुसार, यदि कर का स्रोत पर कटना सिद्ध हो जाता है, तो उसकी दोबारा वसूली कर्मचारी से नहीं की जा सकती। ऐसे मामलों में कर जमा कराने की जिम्मेदारी नियोक्ता की होती है, न कि कर्मचारी की।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि वेतन पर्ची, फॉर्म-16 या अन्य अभिलेखों से यह साबित हो जाए कि टीडीएस काटा गया था, तो कर्मचारी को उसी राशि का दोबारा कर नहीं देना होगा। ऐसे मामलों में आयकर विभाग संबंधित नियोक्ता के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई कर सकता है।
हालांकि, कर्मचारियों को सलाह दी जाती है कि वे प्रत्येक वित्तीय वर्ष में अपना फॉर्म-26एएस और वार्षिक सूचना विवरण (एआईएस) अवश्य जांचें, ताकि टीडीएस जमा होने की स्थिति का समय रहते पता चल सके और किसी भी विसंगति की सूचना नियोक्ता को दी जा सके।
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