नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है। ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत एक सप्ताह में करीब 11 प्रतिशत बढ़कर 88 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई है, जो अप्रैल के बाद सबसे बड़ी साप्ताहिक तेजी मानी जा रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, हॉर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। यह मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक माना जाता है
हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में उछाल के बावजूद 19 जुलाई को भारत में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया। सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने ईंधन के दाम यथावत रखे हैं।
ऊर्जा बाजार के जानकारों का कहना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव लंबे समय तक बना रहता है और कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊंचे स्तर पर रहती हैं, तो आने वाले समय में इसका असर वैश्विक ईंधन बाजार और आयात करने वाले देशों की लागत पर पड़ सकता है। फिलहाल भारतीय उपभोक्ताओं को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में किसी नई बढ़ोतरी का सामना नहीं करना पड़ा है।

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