वित्त वर्ष 2027-28 से लागू होगा नया नियम, कंपनियों और निवेशकों को बढ़ानी होगी पारदर्शिता
नई दिल्ली। भारत सरकार ने श्रीलंका के साथ हुई दोहरे कराधान से बचाव संधि (डीटीएए) में महत्वपूर्ण संशोधन किया है। नए प्रावधान के तहत प्रधान उद्देश्य परीक्षण (प्रिंसिपल पर्पस टेस्ट) नियम लागू किया जाएगा, जिसका उद्देश्य केवल कर छूट पाने के लिए किए जाने वाले लेन-देन पर रोक लगाना है।
नए नियम के अनुसार, यदि किसी निवेश, सौदे या कारोबारी व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य केवल कर संधि का लाभ उठाकर कर बचाना पाया जाता है, तो उस लेन-देन को संधि के तहत मिलने वाली कर छूट का लाभ नहीं मिलेगा।
यह संशोधन वित्त वर्ष 2027-28 से प्रभावी होगा। इसके बाद भारत और श्रीलंका के बीच सीमा-पार निवेश और कारोबारी लेन-देन करने वाली कंपनियों तथा निवेशकों को यह साबित करना होगा कि उनके निवेश का वास्तविक व्यावसायिक उद्देश्य है, केवल कर बचाना नहीं।
कर विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव अंतरराष्ट्रीय कर व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने, कर चोरी पर अंकुश लगाने और वैश्विक मानकों के अनुरूप कर प्रणाली को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे वास्तविक निवेशकों को तो कोई कठिनाई नहीं होगी, लेकिन केवल कर लाभ के उद्देश्य से बनाई गई संरचनाओं पर सख्ती बढ़ेगी।

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