भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा में केन-बेतवा परियोजना के तहत छतरपुर और पन्ना जिले में भूमि अधिग्रहण, मुआवजा और पुनर्वास पैकेज में कथित अनियमितताओं का मामला गूंजा। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि मुआवजा वितरण में गंभीर गड़बड़ियां हुई हैं और कई पात्र परिवार अब भी अपने अधिकार से वंचित हैं।
सदन में सिंघार ने दावा किया कि एक ऐसे गांव में, जहां कोई मुस्लिम परिवार नहीं रहता, वहां आठ लोगों के नाम पर मुआवजा स्वीकृत कर दिया गया। उन्होंने इसे रिकॉर्ड में हेरफेर का गंभीर मामला बताते हुए पूरे पुनर्वास और मुआवजा वितरण की उच्चस्तरीय जांच की मांग की। साथ ही कहा कि उनके तीन अलग-अलग सवालों का सरकार को स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मामले को गंभीर बताते हुए सदन में आश्वासन दिया कि एक माह के भीतर पूरे प्रकरण की जांच कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार नहीं चाहती कि परियोजना से प्रभावित किसी भी स्थानीय व्यक्ति को अनावश्यक परेशानी उठानी पड़े। यदि जांच में किसी भी स्तर पर अनियमितता सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
केन-बेतवा परियोजना मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की महत्वाकांक्षी नदी जोड़ो योजना है। ऐसे में पुनर्वास और मुआवजा प्रक्रिया की पारदर्शिता पर उठे सवाल अब राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गए हैं।

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