प्रणव बजाज
इंदौर। बहुचर्चित इग्स रैकेट की जांच अब केवल क्रिकेट सट्टेबाजी या मूल आर्थिक अपराध तक सीमित नहीं रह गई है। जांच का दायरा तेजी से रियल एस्टेट कारोबार तक फैल गया है। राजेंद्र नगर थाना पुलिस और जांच एजेंसियां अब करोड़ों रुपये के जमीन सौदों, साझेदारी, निवेश और धन के प्रवाह (फंड फ्लो) की परतें खोलने में जुटी हैं। जांच की शुरुआत कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी के भाई नाना पटवारी के नाम सामने आने से हुई थी, लेकिन अब इसकी कड़ियां बिल्डर सुमित मंत्री, उनके कारोबारी साझेदार पप्पू मंत्री और जीतू पटवारी के रिश्तेदार भरत पटवारी तक पहुंच गई हैं।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, पूछताछ के दौरान मिले दस्तावेजों से "शुभम रियलिटी" नामक फर्म जांच के केंद्र में आ गई है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक इस फर्म में सुमित मंत्री और पप्पू मंत्री साझेदार रहे हैं, जबकि नाना पटवारी भी कारोबारी गतिविधियों से जुड़े होने की बात सामने आई है। अब जांच एजेंसियां यह पता लगा रही हैं कि शुभम वैली परियोजना के 374 प्लॉटों की खरीद-बिक्री, निवेश और वित्तीय लेन-देन में किसकी क्या भूमिका थी।
युवती की शिकायत के बाद बदली जांच की दिशा
जांच में बड़ा मोड़ तब आया जब इग्स मामले में गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के दौरान नाना पटवारी का नाम सामने आया। इसके बाद एक युवती ने शुभम वैली में प्लॉट से जुड़ी कथित धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कराई। इसी शिकायत के आधार पर पुलिस ने सबसे पहले बिल्डर सुमित मंत्री को पूछताछ के लिए बुलाया। पूछताछ और दस्तावेजों के विश्लेषण के बाद कई नई जानकारियां सामने आईं, जिसके आधार पर अब पप्पू मंत्री को भी नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए तलब किया गया है।
भरत पटवारी की भूमिका भी जांच के घेरे में
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि सुमित मंत्री की आधा दर्जन से अधिक कंपनियां और फर्म संचालित हैं। इनमें से एक शुभम रियलिटी में भरत पटवारी की भी साझेदारी होने की जानकारी मिली है। इसी आधार पर पुलिस अब भरत पटवारी को भी नोटिस जारी करने की तैयारी कर रही है। जांच एजेंसियां यह स्पष्ट करना चाहती हैं कि भरत पटवारी, नाना पटवारी और पप्पू मंत्री के बीच कारोबारी संबंध किस प्रकार के थे तथा जमीनों के सौदों और निवेश में प्रत्येक की क्या भूमिका रही।
बैंक रिकॉर्ड, रजिस्ट्रियां और फंड फ्लो की जांच
डीसीपी जोन-1 नरेंद्र सिंह रावत के अनुसार पुलिस का फोकस अब केवल इग्स कनेक्शन तक सीमित नहीं है। जांच टीम बैंक खातों के लेन-देन, निवेश के स्रोत, जमीनों की खरीद-बिक्री, साझेदारी के अनुबंध, कंपनी दस्तावेज और रजिस्ट्रियों का मिलान कर रही है। यदि जांच में वित्तीय अनियमितता, धोखाधड़ी या किसी अन्य आपराधिक गतिविधि के प्रमाण मिलते हैं तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
कई सवालों के जवाब अभी बाकी
जांच के केंद्र में अब कई महत्वपूर्ण प्रश्न हैं—क्या शुभम वैली के प्लॉटों की बिक्री में नियमों का पालन हुआ? करोड़ों रुपये का निवेश किन स्रोतों से आया? साझेदारों की वास्तविक भूमिका क्या थी? और क्या रियल एस्टेट कारोबार का उपयोग अवैध धन के लेन-देन के लिए किया गया?
फिलहाल पुलिस दस्तावेजी साक्ष्य जुटाने और संबंधित लोगों से पूछताछ में जुटी है। आने वाले दिनों में इस मामले में कई और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
(नोट: इस समाचार में जिन व्यक्तियों का उल्लेख है, उनके विरुद्ध दोष सिद्ध नहीं हुआ है। उनका नाम पुलिस जांच और नोटिस संबंधी उपलब्ध जानकारी के आधार पर लिया गया है। अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही तय होंगे।)

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