इंदौर। इंदौर नगर निगम के वार्ड क्रमांक 65 के भाजपा पार्षद कमलेश कालरा के जाति प्रमाणपत्र विवाद में नया घटनाक्रम सामने आया है। शिकायत के बाद जांच में जिन दो जाति प्रमाणपत्रों की वैधता पर सवाल उठे थे, उन्हें संबंधित एसडीएम द्वारा निरस्त कर दिया गया है। इस घटनाक्रम ने मामले को एक बार फिर राजनीतिक और कानूनी बहस के केंद्र में ला दिया है।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि कमलेश कालरा द्वारा प्रस्तुत जाति प्रमाणपत्र को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। जांच के दौरान वर्ष 2022 में तत्कालीन एसडीएम कार्यालय से जारी दो प्रमाणपत्रों की भी समीक्षा की गई। जांच पूरी होने के बाद दोनों प्रमाणपत्र निरस्त कर दिए गए। आपके साझा किए गए दस्तावेज़ों में भी इस कार्रवाई का उल्लेख दिखाई देता है।
सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त एक शासकीय पत्र में यह भी कहा गया कि संबंधित समाज मध्य प्रदेश की अन्य पिछड़ा वर्ग सूची में शामिल नहीं है। इसी आधार पर पूरे मामले की जांच आगे बढ़ी और प्रशासनिक कार्रवाई हुई।
मामला पहले से ही न्यायालय के समक्ष विचाराधीन रहा है। ऐसे में अंतिम निर्णय सक्षम न्यायालय और संबंधित वैधानिक प्राधिकरण के आदेशों के अनुसार ही होगा।
बौद्धिक प्रतिकार इस मामले में सभी पक्षों का पक्ष प्रकाशित करने के लिए प्रतिबद्ध है। यदि कमलेश कालरा या उनके प्रतिनिधि इस विषय पर अपना पक्ष रखते हैं, तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

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