कच्चे तेल से बनने वाले कृत्रिम रेशों की आपूर्ति पर पड़ सकता है असर, परिधान उद्योग चिंतित
नई दिल्ली। होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब केवल कच्चे तेल, पेट्रोल, डीजल और विमान ईंधन तक सीमित नहीं रह गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस समुद्री मार्ग में लंबे समय तक बाधा बनी रही, तो इसका प्रभाव वस्त्र उद्योग पर भी पड़ सकता है।
दरअसल, पॉलिएस्टर, नायलॉन और ऐक्रेलिक जैसे कृत्रिम रेशे पेट्रोलियम उत्पादों से तैयार किए जाते हैं। कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित होने या उसकी कीमतों में तेज बढ़ोतरी होने पर इन रेशों के उत्पादन की लागत बढ़ सकती है। परिणामस्वरूप तैयार कपड़ों, विशेषकर ब्रांडेड और फास्ट फैशन उत्पादों की कीमतों पर दबाव पड़ने की आशंका है।
भारत सहित दुनिया के कई परिधान निर्माता इन कृत्रिम रेशों पर निर्भर हैं। यदि कच्चे माल की उपलब्धता घटती है या परिवहन लागत बढ़ती है, तो उत्पादन लागत बढ़ने के साथ-साथ उपभोक्ताओं को भी महंगे कपड़ों का सामना करना पड़ सकता है।
हालांकि, कीमतों में वास्तविक बढ़ोतरी इस बात पर निर्भर करेगी कि होर्मुज क्षेत्र में तनाव कितने समय तक बना रहता है, तेल की वैश्विक आपूर्ति किस हद तक प्रभावित होती है और उद्योग वैकल्पिक स्रोतों से कच्चा माल जुटाने में कितना सफल रहता है।

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