ट्रस्ट की संपत्ति निजी हाथों में जाने के आरोप, टाटा ट्रस्ट्स ने दावों को बताया निराधार
मुंबई। महाराष्ट्र के चैरिटी कमिश्नर ने वर्ष 1989 में हुए एक शेयर हस्तांतरण से जुड़े विवाद में नोएल टाटा से स्पष्टीकरण मांगा है। मामला एक सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट के शेयरों के हस्तांतरण से संबंधित है, जिस पर ट्रस्ट की संपत्ति के कथित रूप से निजी हाथों में जाने के आरोप लगाए गए हैं।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि वर्ष 1989 में किए गए इस शेयर हस्तांतरण के माध्यम से सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट की संपत्ति का गैर-कानूनी तरीके से निजी स्वामित्व में स्थानांतरण किया गया। शिकायत मिलने के बाद चैरिटी कमिश्नर ने मामले का संज्ञान लेते हुए नोएल टाटा को संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने और पूरे लेनदेन पर विस्तृत स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है।
सूत्रों के अनुसार, नोएल टाटा से प्राप्त जवाब और उपलब्ध दस्तावेजों की समीक्षा के बाद चैरिटी कमिश्नर यह तय करेंगे कि मामले में स्वतंत्र जांच कराई जाए या नहीं।
उधर, टाटा ट्रस्ट्स ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें निराधार, तथ्यहीन और कानूनी आधार से रहित बताया है। ट्रस्ट्स का कहना है कि संबंधित शेयर हस्तांतरण पूरी तरह वैधानिक प्रक्रिया के अनुरूप किया गया था और इसमें किसी प्रकार की अनियमितता नहीं हुई।
फिलहाल मामला प्रारंभिक जांच के चरण में है और अंतिम निर्णय संबंधित प्राधिकरण द्वारा दस्तावेजों एवं पक्षों के जवाब के परीक्षण के बाद लिया जाएगा।

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