नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की विदेशी मुद्रा गैर-निवासी बैंक जमा (एफसीएनआर-बी) योजना को उल्लेखनीय सफलता मिली है। महज 42 दिनों के भीतर देश में लगभग 17 अरब डॉलर का विदेशी निवेश आया, जिससे भारत के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूती मिली है।
आंकड़ों के अनुसार, एफसीएनआर-बी जमा के अलावा स्वैप विंडो के माध्यम से विदेशी मुद्रा में लिए गए 1.97 अरब डॉलर के ऋण तथा बाह्य वाणिज्यिक उधारी (ईसीबी) के जरिए 1.34 अरब डॉलर की अतिरिक्त राशि भी प्राप्त हुई।
स्वैप विंडो के तहत वाणिज्यिक बैंक भारतीय रिजर्व बैंक के साथ पूर्व निर्धारित दरों पर डॉलर के बदले रुपये का लेन-देन करते हैं। इस व्यवस्था से बैंकों को विदेशी मुद्रा जुटाने में सुविधा मिलती है, जबकि देश के विदेशी मुद्रा भंडार को भी मजबूती मिलती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच विदेशी मुद्रा भंडार में यह बढ़ोतरी भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती का संकेत है। इससे रुपये की स्थिरता बनाए रखने, आयात भुगतान की क्षमता बढ़ाने और वित्तीय बाजार में भरोसा मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
भारतीय रिजर्व बैंक की इस पहल के प्रति प्रवासी भारतीयों और वित्तीय संस्थानों की सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिली है, जिसके चलते एफसीएनआर-बी जमा में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

Post a Comment