वॉशिंगटन/तेहरान। पश्चिम एशिया में तनाव लगातार गहराता जा रहा है। अमेरिका ने ईरान पर लगातार दसवीं रात हवाई हमले किए हैं और चेतावनी दी है कि यदि ईरान अपने रुख में बदलाव नहीं करता, तो सैन्य कार्रवाई और तेज की जा सकती है। दूसरी ओर, ईरान की ओर से एक तेल टैंकर पर हमले की खबर ने क्षेत्र में हालात और गंभीर बना दिए हैं।
इस बढ़ते टकराव का सबसे बड़ा असर होर्मुज जलडमरूमध्य पर दिखाई दे रहा है, जहां से दुनिया के समुद्री मार्ग से होने वाले कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा गुजरता है। सुरक्षा जोखिम बढ़ने के कारण कई जहाजों ने अपने मार्ग बदल दिए हैं, जबकि बीमा और माल ढुलाई की लागत भी बढ़ने लगी है।
तनाव बढ़ने के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संघर्ष लंबा खिंचता है या होर्मुज जलडमरूमध्य में आवाजाही बाधित होती है, तो पेट्रोल, डीजल, विमान ईंधन, रसायन और प्लास्टिक उद्योग पर व्यापक असर पड़ सकता है। इसके साथ ही तैयार कपड़े, उपभोक्ता वस्तुएं और समुद्री व्यापार भी महंगा हो सकता है।
अमेरिका ने कहा है कि उसका उद्देश्य क्षेत्रीय सुरक्षा बनाए रखना और समुद्री मार्गों को सुरक्षित रखना है। वहीं ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह किसी भी बाहरी दबाव के आगे नहीं झुकेगा और अपने हितों की रक्षा के लिए जवाबी कार्रवाई जारी रखेगा।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच कूटनीतिक समाधान नहीं निकला, तो यह संघर्ष पूरे पश्चिम एशिया की स्थिरता और वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। दुनिया की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में दोनों पक्ष सैन्य कार्रवाई बढ़ाते हैं या बातचीत का रास्ता अपनाते हैं।

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