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इंदौर नगर निगम में करोड़ों के संपत्ति कर हेरफेर की जांच तेज, अग्रवाल पब्लिक स्कूल का मामला फिर सुर्खियों में

 

रिकॉर्ड में कथित गड़बड़ी, बर्खास्त राजस्व अधिकारी और गायब फाइल ने खड़े किए कई सवाल

प्रणव बजाज

इंदौर। इंदौर नगर निगम में अग्रवाल पब्लिक स्कूल के संपत्ति कर निर्धारण से जुड़े कथित करोड़ों रुपये के राजस्व नुकसान का मामला एक बार फिर चर्चा में है। नगर निगम द्वारा संबंधित राजस्व अधिकारी के विरुद्ध की गई विभागीय कार्रवाई के बाद अब पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है।


उपलब्ध दस्तावेजों और अधिकारियों के बयानों के अनुसार, स्कूल की संपत्ति के क्षेत्रफल और कर निर्धारण में कथित विसंगतियों के कारण निगम को बड़े राजस्व नुकसान की आशंका जताई गई थी। मामले में तत्कालीन प्रभारी सहायक राजस्व अधिकारी अरविंद नायक के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई हुई और उन्हें सेवा से पृथक कर दिया गया।

इसी बीच यह जानकारी भी सामने आई कि संपत्ति कर से संबंधित मूल फाइल विभाग से उपलब्ध नहीं है। यदि यह तथ्य जांच में सही पाया जाता है, तो यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि जांच की दिशा को प्रभावित करने वाला गंभीर विषय माना जा सकता है।

अब इस पूरे मामले में कई महत्वपूर्ण प्रश्न उठ रहे हैं—

- क्या संपत्ति कर निर्धारण में क्षेत्रफल जानबूझकर बदला गया था या यह तकनीकी त्रुटि थी?

- मूल फाइल विभाग से कैसे गायब हुई और इसकी जिम्मेदारी किसकी है?

- क्या पूरे प्रकरण की आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ अथवा स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाएगी?

- यदि निगम को राजस्व हानि हुई है तो उसकी भरपाई किससे की जाएगी?

- क्या संबंधित संपत्तियों के राजस्व, भूमि अभिलेख और निर्माण अनुमति की स्वतंत्र जांच होगी

नगर निगम और जिला प्रशासन यदि इस पूरे मामले की पारदर्शी जांच कर उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक करते हैं, तो करोड़ों रुपये के कथित राजस्व नुकसान और उससे जुड़े सभी संदेहों पर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

नोट: यह रिपोर्ट उपलब्ध दस्तावेजों, सार्वजनिक दावों और विभागीय कार्रवाई से संबंधित सूचनाओं के आधार पर तैयार की गई है। संबंधित पक्ष यदि अपना पक्ष या स्पष्टीकरण देना चाहते हैं, तो बौद्धिक प्रतिकार उसे समान प्रमुखता से प्रकाशित करेगा।

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