नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक ने एलजीबीटीक्यू+ समुदाय को भारतीय समाज का अभिन्न हिस्सा बताते हुए कहा कि उन्हें सम्मान, समान अवसर और गरिमापूर्ण जीवन का अधिकार मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपराओं में ऐसे समुदायों के अस्तित्व को लंबे समय से स्वीकार किया गया है।
मोहन भागवत ने कहा कि समाज को एलजीबीटीक्यू+ समुदाय के लोगों को हीन भावना से नहीं देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि कुछ मामलों में चिकित्सकीय सहायता संभव हो सकती है, जबकि कुछ स्थितियां ऐसी होती हैं जिनमें ऐसा संभव नहीं होता। ऐसे सभी लोग भी इंसान हैं और उन्हें सम्मानपूर्वक जीवन जीने का पूरा अधिकार है।
उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति और परंपरा समावेशी रही है तथा सामाजिक जीवन के व्यापक ताने-बाने में प्रत्येक व्यक्ति के लिए स्थान है। किसी भी व्यक्ति को उसकी पहचान के आधार पर समाज से अलग-थलग नहीं किया जाना चाहिए।
युवा पीढ़ी का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि आज के युवा अपने विचारों के अनुसार निर्णय लेते हैं। समाज को बदलते समय के साथ संवाद बनाए रखते हुए सभी के प्रति संवेदनशील और सम्मानजनक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।

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