नई दिल्ली। लोकसभा में पेपर लीक रोकने के लिए लाए गए नए कानून पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। सरकार ने पिछली यूपीए सरकारों पर पेपर लीक के मामलों में निष्क्रिय रहने का आरोप लगाया, जबकि कांग्रेस ने जवाब दिया कि केवल नया कानून बना देने से समस्या खत्म नहीं होगी, क्योंकि पहले भी कानून मौजूद थे और तब भी प्रश्नपत्र लीक होते रहे
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चर्चा की शुरुआत केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने की। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों के समय कई बड़ी भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक हुए, लेकिन दोषियों के खिलाफ कठोर और प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। उनके अनुसार, वर्तमान सरकार परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए सख्त कानूनी व्यवस्था लागू कर रही है।
वहीं कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने सरकार के दावों को चुनौती देते हुए कहा कि केवल कानून बनाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि हाल के वर्षों में भी अनेक भर्ती परीक्षाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक हुए हैं। उनका कहना था कि यदि सरकार पहले से उपलब्ध कानूनी प्रावधानों का प्रभावी ढंग से पालन करती, तो बार-बार लाखों युवाओं का भविष्य दांव पर नहीं लगता।
कांग्रेस ने यह भी कहा कि सरकार को जवाब देना चाहिए कि हाल के वर्षों में हुए पेपर लीक मामलों में कितने बड़े आरोपियों को सजा मिली और कितने मामलों का अंतिम निपटारा हुआ। विपक्ष ने इसे युवाओं के भविष्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताते हुए केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर ठोस प्रशासनिक सुधारों की मांग की।
उधर सरकार का कहना है कि नया कानून संगठित पेपर लीक गिरोहों पर कड़ी कार्रवाई, सख्त दंड और परीक्षा प्रक्रिया की सुरक्षा को मजबूत करेगा। सरकार का दावा है कि इससे भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी तथा युवाओं का विश्वास बहाल होगा।

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