मोहन यादव सरकार का बड़ा खुलासा.



करोड़पति मुख्यमंत्री, दागी मंत्रिमंडल! हर तीन में से एक मंत्री पर आपराधिक मामला

प्रणव बजाज

मध्य प्रदेश की राजनीति में एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) और नेशनल इलेक्शन वॉच की चुनावी हलफनामों पर आधारित रिपोर्ट ने नई बहस छेड़ दी है। रिपोर्ट के अनुसार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की घोषित संपत्ति लगभग ₹42.04 करोड़ है, जिससे वे देश के संपन्न मुख्यमंत्रियों में शामिल हैं। वहीं, रिपोर्ट के अनुसार राज्य मंत्रिमंडल के लगभग 39 प्रतिशत मंत्रियों ने अपने चुनावी हलफनामों में अपने विरुद्ध आपराधिक मामलों का उल्लेख किया है। इनमें से करीब 10 प्रतिशत मंत्रियों ने गंभीर प्रकृति के मामलों की जानकारी भी दी है।



एडीआर की रिपोर्ट चुनाव आयोग के समक्ष उम्मीदवारों द्वारा स्वयं दायर शपथपत्रों के विश्लेषण पर आधारित है। इसका अर्थ यह नहीं है कि जिन नेताओं के विरुद्ध मामले दर्ज हैं, वे किसी अपराध में दोषी सिद्ध हो चुके हैं। भारतीय कानून के अनुसार किसी भी व्यक्ति को अदालत द्वारा दोषी ठहराए जाने तक निर्दोष माना जाता है।


रिपोर्ट में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की घोषित संपत्ति लगभग ₹42.04 करोड़ बताई गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुख्यमंत्री की आर्थिक स्थिति और उनकी कैबिनेट की आपराधिक पृष्ठभूमि को लेकर सामने आए आंकड़े राजनीतिक विमर्श का विषय बन सकते हैं।


मंत्रिमंडल के संबंध में एडीआर के विश्लेषण के अनुसार लगभग 39 प्रतिशत मंत्रियों ने अपने हलफनामों में आपराधिक मामले दर्ज होने की जानकारी दी है। इनमें से लगभग 10 प्रतिशत ने गंभीर आपराधिक मामलों का भी उल्लेख किया है। चुनावी सुधारों की मांग करने वाले संगठनों का कहना है कि राजनीतिक दलों को ऐसे उम्मीदवारों के चयन में अधिक पारदर्शिता बरतनी चाहिए।


मुख्यमंत्री स्वयं उच्च शिक्षित हैं और उन्होंने डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की है। ऐसे में राजनीतिक हलकों में यह प्रश्न भी उठ रहा है कि सुशासन और स्वच्छ राजनीति के दावों के बीच आपराधिक मामलों वाले जनप्रतिनिधियों की संख्या को लेकर राजनीतिक दलों की जवाबदेही कैसे तय होगी।


एडीआर लंबे समय से राजनीतिक दलों से आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों को टिकट देने के कारण सार्वजनिक करने, अधिक पारदर्शिता अपनाने और चुनावी सुधारों को लागू करने की मांग करता रहा है। सर्वोच्च न्यायालय भी समय-समय पर राजनीतिक दलों को ऐसे उम्मीदवारों के चयन का कारण सार्वजनिक करने के निर्देश दे चुका है।


यह रिपोर्ट ऐसे समय सामने आई है जब मध्य प्रदेश में सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर राजनीतिक बहस तेज है। आने वाले समय में इस रिपोर्ट को लेकर सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक प्रतिक्रिया देखने को मिल सकती है।


कब इस्तीफा देगी मोहन सरकार जनता पूछ रही है ?

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