Top News

भविष्य का निर्माण: 'प्लानिंग' के क्षेत्र में करियर और संभावनाएँ*


कक्षा 10वीं या 12वीं पास करने के बाद हर विद्यार्थी के सामने सबसे बड़ा सवाल होता है—आगे क्या पढ़ें और किस क्षेत्र में करियर बनाएं? हमारे समाज में अक्सर डॉक्टर, इंजीनियर, सीए या सिविल सेवा जैसे करियर विकल्पों की ही सबसे ज्यादा चर्चा होती है। लेकिन आज मैं आपको एक ऐसे क्षेत्र के बारे में बताना चाहता हूँ, जिसकी आज देश को बहुत जरूरत है और जिसमें आने वाले समय में रोजगार की संभावनाएँ लगातार बढ़ रही हैं। यह क्षेत्र है—प्लानिंग।


क्या आपने कभी सोचा है कि किसी शहर में सड़कें कहाँ बनेंगी, मेट्रो किस रास्ते से जाएगी, नए स्कूल और अस्पताल कहाँ बनेंगे या पार्क और खेल के मैदान के लिए जगह कैसे तय होती है? यह सब अपने-आप नहीं होता। इसके पीछे प्लानर्स की सोच और मेहनत होती है।

प्लानिंग का मतलब सिर्फ नक्शे बनाना नहीं है। इसका काम यह तय करना है कि शहर और गाँव कैसे विकसित हों ताकि लोगों को अच्छी सड़कें, साफ पानी, बेहतर यातायात, पर्याप्त हरियाली और रहने के लिए अच्छा माहौल मिल सके। जहाँ एक आर्किटेक्ट किसी एक इमारत की योजना बनाता है, वहीं एक टाउन प्लानर पूरे शहर के विकास की योजना तैयार करता है।

अक्सर विद्यार्थी 10वीं या 12वीं तक इस क्षेत्र के बारे में जानते ही नहीं हैं। इसलिए वे बिना पूरी जानकारी के वही विषय चुन लेते हैं जो सबसे ज्यादा प्रचलित होते हैं। यदि आपको गणित, भूगोल, पर्यावरण और नई तकनीकों में रुचि है और आप समाज के लिए कुछ अच्छा करना चाहते हैं, तो प्लानिंग आपके लिए बेहतरीन करियर हो सकता है।

भारत में प्लानिंग की पढ़ाई के लिए कई अच्छे संस्थान हैं। 12वीं (मुख्य रूप से गणित के साथ) पास करने के बाद आप बैचलर ऑफ प्लानिंग (B.Plan) में प्रवेश ले सकते हैं। इसके लिए कई राष्ट्रीय और राज्य स्तर की प्रवेश परीक्षाएँ होती हैं। यदि आपने सिविल इंजीनियरिंग, आर्किटेक्चर, भूगोल, अर्थशास्त्र या इससे जुड़े विषयों में स्नातक किया है, तो आगे मास्टर ऑफ प्लानिंग (M.Plan) भी कर सकते हैं।

अब सबसे बड़ा सवाल है पढ़ाई के बाद नौकरी कहाँ मिलेगी?

आज देश तेजी से शहरों का विकास कर रहा है। स्मार्ट सिटी, अमृत योजना, मेट्रो रेल, एक्सप्रेस-वे, औद्योगिक क्षेत्र और नई टाउनशिप जैसी परियोजनाओं के कारण प्लानर्स की मांग लगातार बढ़ रही है। विकास प्राधिकरण, नगर निगम, नगर एवं ग्राम निवेश विभाग, राज्य और केंद्र सरकार के कई विभागों में प्लानर्स की जरूरत होती है। इसके अलावा एनएचएआई, मेट्रो रेल परियोजनाएँ, हुडको, निजी कंसल्टेंसी कंपनियाँ, रियल एस्टेट कंपनियाँ और बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियाँ भी प्लानर्स को नियुक्त करती हैं।

यदि आपकी रुचि नई तकनीकों में है, तो जीआईएस (GIS), रिमोट सेंसिंग, ड्रोन सर्वे और डिजिटल मैपिंग जैसे क्षेत्रों में भी अच्छे अवसर हैं। विदेशों में भी भारतीय प्लानर्स की मांग बढ़ रही है। चाहें तो अनुभव हासिल करने के बाद अपनी खुद की कंसल्टेंसी भी शुरू की जा सकती है।

आने वाले वर्षों में भारत के शहर तेजी से बढ़ेंगे। 2050 तक देश की बड़ी आबादी शहरों में रहने लगेगी। ऐसे में सबसे बड़ी चुनौती होगी साफ पानी, बेहतर यातायात, हरियाली, प्रदूषण पर नियंत्रण और लोगों के लिए बेहतर जीवन। इन सभी चुनौतियों का समाधान तैयार करने में प्लानर्स की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

प्लानिंग की पढ़ाई आपको सिर्फ एक अच्छी नौकरी नहीं देती, बल्कि लोगों का जीवन बेहतर बनाने का अवसर भी देती है। यह ऐसा पेशा है जिसमें सम्मान, अच्छी आय और समाज के लिए काम करने का संतोष तीनों मिलते हैं।

अक्सर हम वही रास्ता चुन लेते हैं जिस पर सबसे ज्यादा लोग चल रहे होते हैं। लेकिन हर अच्छा करियर भीड़ में नहीं मिलता। कई बार अलग रास्ता ही सबसे बेहतर मंजिल तक पहुँचाता है।

यदि आपको नक्शे समझना अच्छा लगता है, शहरों के विकास में रुचि है, पर्यावरण की चिंता है और आप नई तकनीकों के साथ काम करना चाहते हैं, तो प्लानिंग आपके लिए एक शानदार करियर विकल्प हो सकता है।

किसी भी विषय का चुनाव करने से पहले उसके बारे में पूरी जानकारी जरूर लें। कॉलेजों की वेबसाइट देखें, विशेषज्ञों से बात करें और अपनी रुचि को पहचानें। सही जानकारी ही सही करियर की पहली सीढ़ी होती है।

मुझे विश्वास है कि यह जानकारी आपके भविष्य का सही रास्ता चुनने में मदद करेगी। हो सकता है, आने वाले वर्षों में आप ही उन लोगों में शामिल हों जो भारत के बेहतर, सुंदर और व्यवस्थित शहरों का निर्माण करेंगे।

- लेखक:

विष्णु खरे

संयुक्त संचालक, नगर तथा ग्राम निवेश, मध्य प्रदेश

चेयरमैन, इंस्टिट्यूट ऑफ टाउन प्लानर्स, इंडिया (मध्य प्रदेश चैप्टर)

Post a Comment

Previous Post Next Post