नई दिल्ली। आयकर रिटर्न (आईटीआर) दाखिल करते समय छोटी-सी लापरवाही भी वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए महंगी साबित हो सकती है। कर विशेषज्ञों के अनुसार केवल फॉर्म-16 पर निर्भर रहना, आय का पूरा विवरण नहीं देना या गलत कर व्यवस्था चुनना आयकर विभाग के नोटिस, अतिरिक्त कर और जुर्माने का कारण बन सकता है।
विशेषज्ञों ने आईटीआर दाखिल करते समय इन सात प्रमुख गलतियों से बचने की सलाह दी है—
1. केवल फॉर्म-16 पर निर्भर रहना: यदि वेतन के अलावा ब्याज, किराया, पूंजीगत लाभ या अन्य आय है तो उसे भी रिटर्न में शामिल करना आवश्यक है।
2. एआईएस और फॉर्म-26एएस का मिलान नहीं करना: वार्षिक सूचना विवरण (एआईएस) और फॉर्म-26एएस में दर्ज जानकारी का रिटर्न से मिलान अवश्य करें, ताकि किसी लेनदेन की जानकारी छूट न जाए।
3. गलत कर व्यवस्था का चयन: पुरानी और नई कर व्यवस्था में से अपनी आय और उपलब्ध छूट के अनुसार सही विकल्प चुनें।
4. अतिरिक्त आय छिपाना: बैंक ब्याज, सावधि जमा, लाभांश, शेयर या म्यूचुअल फंड से होने वाली आय का खुलासा नहीं करने पर नोटिस मिल सकता है।
5. गलत कटौती या छूट का दावा: बिना पात्रता के कर बचत संबंधी कटौतियों का दावा करने से दावा अस्वीकार हो सकता है और अतिरिक्त कर देना पड़ सकता है।
6. बैंक खाते और व्यक्तिगत जानकारी में त्रुटि: गलत बैंक खाता, पैन, आधार या अन्य विवरण देने से रिफंड में देरी हो सकती है।
7. रिटर्न दाखिल करने के बाद सत्यापन नहीं करना: आईटीआर जमा करने के बाद निर्धारित समय के भीतर उसका सत्यापन करना अनिवार्य है। सत्यापन नहीं होने पर रिटर्न को अमान्य माना जा सकता है।
कर विशेषज्ञों का कहना है कि आईटीआर दाखिल करने से पहले सभी वित्तीय दस्तावेजों का मिलान कर लें और प्रत्येक आय का सही विवरण दें। इससे नोटिस, अतिरिक्त कर और अनावश्यक विवादों से बचा जा सकता है।

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