नई दिल्ली। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) को छह सांसदों के एकनाथ शिंदे गुट में विलय के मामले में सुप्रीम कोर्ट से तत्काल राहत नहीं मिली है। सर्वोच्च न्यायालय ने याचिका पर सुनवाई करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, लोकसभा सचिवालय और शिंदे गुट में शामिल हुए छह सांसदों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। हालांकि अदालत ने फिलहाल लोकसभा अध्यक्ष के फैसले पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया।
यूबीटी की ओर से सांसद अरविंद सावंत ने याचिका दायर कर लोकसभा अध्यक्ष द्वारा छह सांसदों के शिंदे गुट में विलय को मान्यता देने के फैसले को चुनौती दी है। याचिका में कहा गया है कि यह निर्णय संविधान की दसवीं अनुसूची (दल-बदल कानून) और संसदीय प्रक्रिया के अनुरूप नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले को सुनवाई के लिए स्वीकार करते हुए सभी पक्षों से जवाब मांगा है। अब इस राजनीतिक रूप से अहम विवाद पर अंतिम फैसला अदालत में विस्तृत सुनवाई के बाद होगा। यह मामला महाराष्ट्र की राजनीति और संसद में शिवसेना के दोनों गुटों की स्थिति पर महत्वपूर्ण असर डाल सकता है।

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