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सरकारी प्रेस में रद्दी घोटाला! 3 टन दिखाकर 12 टन बेची, करोड़ों के नुकसान का दावा ?

 

प्रणव बजाज


भोपाल। मध्य प्रदेश के शासकीय मुद्रण एवं लेखन सामग्री विभाग (गवर्नमेंट प्रेस) में रद्दी कागज की बिक्री को लेकर बड़े घोटाले के आरोप सामने आए हैं। दस्तावेजों और तौल पर्चियों के आधार पर दावा किया गया है कि सरकारी अभिलेखों में ट्रकों का वजन वास्तविक वजन से काफी कम दर्ज किया गया, जिससे सरकार को करोड़ों रुपये के नुकसान की आशंका जताई जा रही है। मामले ने विभागीय अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 



जांच में सामने आए दस्तावेजों के अनुसार, दो ट्रकों में वास्तविक रूप से करीब 29.7 टन रद्दी लदी थी, जबकि सरकारी रिकॉर्ड में इसे करीब 6.82 टन ही दर्शाया गया। यानी लगभग 23 टन रद्दी का हिसाब रिकॉर्ड में नहीं मिला। आरोप है कि इसी तरह की गड़बड़ी अन्य खेपों में भी हुई तो सरकार को करीब 1.34 करोड़ रुपये तक का नुकसान हो सकता है।


बताया गया कि 60 मीट्रिक टन रद्दी की बिक्री के लिए टेंडर जारी किया गया था। जांच टीम ने ट्रकों का पीछा कर निजी धर्मकांटे पर दोबारा तौल कराई, जहां वास्तविक वजन और सरकारी अभिलेखों में बड़ा अंतर सामने आया। तौल पर्चियों के समय, क्रमांक और रिकॉर्ड में भी कई विसंगतियां बताई जा रही हैं।


मामले के सामने आने के बाद जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब मांगा गया है। संबंधित मंत्री ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो यह प्रदेश के सरकारी विभागों में रद्दी बिक्री से जुड़े सबसे बड़े घोटालों में से एक माना जा सकता है।

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