विशेष रिपोर्ट | बौद्धिक प्रतिकार
मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी एक बार फिर बड़े राजनीतिक और कानूनी विवाद में घिर गए हैं। उज्जैन स्थित वीर भारत न्यास को कथित तौर पर 500 करोड़ रुपये मूल्य की सरकारी जमीन मात्र 1 रुपये की लीज पर दिए जाने का आरोप लगाने के बाद अब उनके खिलाफ 5 करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस भेजा गया है
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नोटिस वीर भारत न्यास के सचिव एवं मुख्यमंत्री के सांस्कृतिक सलाहकार श्रीराम तिवारी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ताओं के माध्यम से भेजा गया है। इसमें कहा गया है कि पटवारी के आरोप निराधार, भ्रामक और तथ्यों से परे हैं। उनसे तीन दिन के भीतर सार्वजनिक रूप से आरोप वापस लेने, बिना शर्त माफी मांगने और स्पष्टीकरण देने की मांग की गई है। अन्यथा उनके खिलाफ अदालत में मानहानि का दावा दायर किया जाएगा।
पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ जब जीतू पटवारी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया कि उज्जैन की लगभग 500 करोड़ रुपये मूल्य की सरकारी संपत्ति एक ट्रस्ट को नाममात्र की लीज पर दी गई। इसके जवाब में वीर भारत न्यास ने दावा किया कि वह कोई निजी संस्था नहीं, बल्कि सरकार द्वारा गठित सार्वजनिक न्यास है और उसके संबंध में लगाए गए आरोप पूरी तरह गलत हैं।
इस विवाद ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। भाजपा कांग्रेस पर झूठे आरोप लगाने का आरोप लगा रही है, जबकि कांग्रेस की ओर से अभी इस कानूनी नोटिस पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। यदि निर्धारित समय में जवाब नहीं दिया जाता है तो मामला अदालत तक पहुंच सकता है।
फिलहाल यह स्पष्ट करना जरूरी है कि जीतू पटवारी पर अदालत ने 5 करोड़ रुपये का जुर्माना नहीं लगाया है, बल्कि उनके खिलाफ 5 करोड़ रुपये का कानूनी मानहानि नोटिस जारी किया गया है। आगे की कानूनी कार्रवाई नोटिस के जवाब और न्यायालय की प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।

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