इंदौर। बौद्धिक प्रतिकार।
एक नागरिक की शिकायत पर मध्य प्रदेश शासन को लाखों रुपये की राजस्व वसूली होने का मामला सामने आया है। भाजपा सहकारिता प्रकोष्ठ के पूर्व नगर संयोजक जगमोहन वर्मा ने दावा किया है कि उनकी शिकायत के आधार पर वर्ष 2010 से लंबित हस्तांतरण शुल्क की राशि संबंधित उद्योग से वसूल की गई।
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, वर्मा ने मध्य प्रदेश एसोसिएशन ऑफ इंडस्ट्रीज, इंदौर के अध्यक्ष एवं मैसर्स नीव अलॉयज एंड मेटल्स प्रा. लि. तथा मैसर्स व्यूवेस्ट अलॉयज एंड मेटल प्रा. लि. के संचालक योगेश मेहता के विरुद्ध शिकायत की थी। आरोप था कि वर्ष 2010 से देय पूर्ण हस्तांतरण शुल्क जिला प्रशासन के पास जमा नहीं कराया गया था।
विज्ञप्ति में उल्लेख है कि 21 जुलाई को विधानसभा में पूछे गए प्रश्न के उत्तर में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चेतन्य कुमार काश्यप ने बताया कि संबंधित दोनों इकाइयों से ₹28,03,827 की राशि वसूल की जा चुकी है।
अब ब्याज वसूली की भी मांग
जगमोहन वर्मा ने कहा है कि चूंकि यह राशि वर्ष 2010 से लंबित थी, इसलिए नियमानुसार ब्याज की भी वसूली की जानी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो मामले को उच्च न्यायालय में ले जाया जाएगा।
कार्रवाई की मांग
विज्ञप्ति में यह भी मांग की गई है कि उस समय के जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र के संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच कर उनके विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई की जाए।
बौद्धिक प्रतिकार का सवाल
यदि वर्ष 2010 से लंबित शासकीय देय राशि अब जाकर वसूल हुई है, तो सवाल यह है कि 15 वर्षों तक जिम्मेदार अधिकारियों ने कार्रवाई क्यों नहीं की? क्या इस देरी की जवाबदेही तय होगी, या मामला केवल राशि वसूली तक ही सीमित रह जाएगा?

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