भोपाल। बौद्धिक प्रतिकार।
मध्य प्रदेश विधानसभा का पांच दिवसीय मानसून सत्र तय समय से दो दिन पहले ही समाप्त हो गया। सरकार ने मात्र तीन दिनों में रिकॉर्ड 14 विधेयक पारित करा दिए। पूरे सत्र में सत्ता और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर तीखी बहस हुई। अंतिम दिन 'कीड़ा' शब्द को लेकर विवाद ने सदन का माहौल गरमा दिया और कई बार कार्यवाही बाधित करनी पड़ी।
मेडिकल यूनिवर्सिटी के बंटवारे पर तीखी बहस
सत्र में जबलपुर स्थित मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय के विभाजन संबंधी विधेयक पर विपक्ष ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। कांग्रेस विधायक लखन घनघोरिया ने सरकार से पूछा कि 15 वर्ष पुरानी यूनिवर्सिटी को विभाजित करने की आवश्यकता क्या है और क्या इस निर्णय से पहले विशेषज्ञों एवं चिकित्सकों की राय ली गई थी।
विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार चिकित्सा शिक्षा व्यवस्था को कमजोर कर रही है, जबकि सत्ता पक्ष ने इसे क्षेत्रीय संतुलन और बेहतर प्रशासन की दिशा में आवश्यक कदम बताया।
7455 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट पेश
वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने सदन में 7455 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट प्रस्तुत किया। इस पर करीब तीन घंटे चर्चा हुई।
कांग्रेस विधायक बाला बच्चन ने आरोप लगाया कि बजट में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग की उपेक्षा की गई है। उन्होंने राज्य की वित्तीय स्थिति और बढ़ते कर्ज पर भी सवाल उठाए।
गुजरात को पानी देने का मुद्दा
बाला बच्चन ने आरोप लगाया कि मध्य प्रदेश के हितों की अनदेखी कर गुजरात को लाभ पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश का बकाया भुगतान और जल बंटवारे के मुद्दे स्पष्ट किए जाने चाहिए।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जवाब देते हुए कहा कि सरदार सरोवर परियोजना से मध्य प्रदेश को अतिरिक्त पानी और बिजली का लाभ मिल रहा है तथा विपक्ष के आरोप तथ्यात्मक नहीं हैं।
18 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भी विवाद
विपक्ष ने 18 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के संचालन और स्वास्थ्य सेवाओं के निजीकरण के मुद्दे पर सरकार को घेरा। सरकार ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के उद्देश्य से निर्णय लिए जा रहे हैं।
'कीड़ा' शब्द पर हंगामा
अंतिम दिन सदन में 'कीड़ा' शब्द के प्रयोग को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए। विवाद इतना बढ़ा कि कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित करनी पड़ी। अध्यक्ष के हस्तक्षेप के बाद सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू हो सकी।
रिकॉर्ड विधायी कामकाज
पांच दिन का सत्र केवल तीन दिन में समाप्त।
14 विधेयक पेश होकर पारित।
7455 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट पारित।
मेडिकल यूनिवर्सिटी विभाजन पर तीखी बहस।
गुजरात को पानी, स्वास्थ्य सेवाओं और आरक्षण सहित कई मुद्दों पर सरकार-विपक्ष आमने-सामने रहे।
बौद्धिक प्रतिकार का सवाल
क्या तीन दिन में 14 विधेयकों को पारित करना विधायी दक्षता का उदाहरण है, या फिर लोकतांत्रिक बहस और विपक्ष की भूमिका को सीमित करने की जल्दबाजी? जनता से जुड़े कानूनों पर पर्याप्त चर्चा होना भी उतना ही आवश्यक है, जितना उनका समय पर पारित होना।

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