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प्रतिभा और सुरेश की आवाज ने लूट लिया मंच; कला के कद्रदानों ने बजाई तालियां Pratibha and Suresh's voices stole the show; art lovers applauded.

 

आर्केस्ट्रा रिदम के निर्देशक राजू पांडे ने सजाई भूले बिसरे गीतों की शाम 

संवाददाता । सागर 

"यूं ही तुम मुझसे बात करती हो या कोई प्यार का इरादा है"... इस गीत पर जब कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि डॉ सुरेश चंद्र रावत और सागर के कोतवाली थाने में तैनात कांस्टेबल प्रतिभा ठाकुर ने अपनी आवाज का जादू बिखेरा तो कला के कद्रदानों ने तालियो की गढ़गढ़ाहट से इनका स्वागत किया। 


मौका था- सागर के सिविल लाइन स्थित एक होटल में आर्केस्ट्रा "रिदम" की ओर से भूले बिसरे गीतों की शाम। निर्देशक राजू पांडे ने इस शाम का टाइटल "गर तुम भुला ना दोगे" दिया। सैकड़ो लोगों की मौजूदगी में जब 80 साल की उम्र पार कर चुके सागर के वरिष्ठ चिकित्सा एवं समाजसेवी डॉक्टर सुरेश चंद्र रावत और उनके साथ युगल प्रतिभा ठाकुर मंच पर आई तो लोगों की फरमाइश और बढ़ गई। पहले डॉक्टर रावत ने मोहम्मद रफी के उस गीत" दिन ढल जाए हाय रात ना जाए"... को गाया तो लोग मस्ती में वाह वाह... कहकर तालियां बजाने लगे। 

उसके बाद रात ढलती गई और महफिल जमती गई। रात 8:00 बजे शुरू हुआ कार्यक्रम आधी रात तक चलता रहा। डॉ रेखा बक्शी; पंकज दीक्षित; काव्या मिश्रा और उनकी टीम के अलावा कई कलाकारों ने अपनी अपनी प्रस्तुति दी। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि कृष्णकांत बक्शी; डॉ रेखा बक्शी अंकलेश्वर दुबे; हिमांशु चौबे एडवोकेट अजय श्रीवास्तव पंकज दीक्षित थे। कार्यक्रम में सागर के कई संगीत प्रेमी शामिल हुए।

* परिवार का साथ मिला तो इस पथ पर आगे बढ़ी : प्रतिभा ठाकुर

सागर कोतवाली में पदस्थ कांस्टेबल प्रतिभा ठाकुर भी अपने नाम के अनुरूप प्रतिभा की धनी है। उनकी वाणी में सरस्वती विराजमान है। मंच पर जब माइक थामकर उन्होंने अपनी प्रस्तुति दी तो लोग उनकी कला के कायल हो गए। "संवाददाता" ने जब उनसे इस पथ पर आगे बढ़ने का राज पूछा तो प्रतिभा का कहना है- यह प्रेरणा उन्हें परिवार से मिली है। प्रतिभा आज तक ना किसी संगीत की पाठशाला में गई और वाद्य यंत्र का उनका दूर-दूर से वास्ता नहीं है फिर भी इतनी कम उम्र में और सरकारी नौकरी में होते हुए इस कला को पाना वाकई में काबिल-ए-तारीफ है। 

सरकारी नौकरी और उस पर पुलिस की। जिसकी हमेशा इमरजेंसी ड्यूटी रहती है बावजूद संगीत के मैदान में लता और आशा भोंसले जैसे बनने की चाहत रखने वाली प्रतिभा की कला तारीफ के काबिल है। 

प्रतिभा का कहना है परिवार में माता-पिता; भाई बहन ने हमेशा मुझे आगे बढ़ने का मौका दिया है। आज जो कुछ मैं हूं परिवार का साथ प्यार और सहयोग ही मेरा आधार है। गौरतलब है सागर पुलिस डिपार्टमेंट में कई ऐसी प्रतिमाएं हैं; जो अलग-अलग क्षेत्र में अपना परचम लहरा रही है।

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