भारत और नेपाल के संबंधों में पिछले कुछ वर्षों के उतार-चढ़ाव के बाद अब रिश्तों में नई सकारात्मकता के संकेत दिखाई दे रहे हैं। नेपाल के विदेश मंत्री Arzu Rana Deuba ने भारत दौरे के दौरान स्पष्ट कहा कि नेपाल पुरानी बातों का बोझ लेकर आगे नहीं बढ़ना चाहता और भारत उसके लिए सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदारों में से एक है।
नई दिल्ली में उन्होंने भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय संबंध, व्यापार, ऊर्जा सहयोग, कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। इसके अलावा नेपाल के विदेश मंत्री ने भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार Ajit Doval से भी मुलाकात की।
रिश्तों में बदलाव के संकेत
नेपाल और भारत के बीच पिछले कुछ वर्षों में सीमा विवाद, राजनीतिक बयानबाजी और चीन की बढ़ती सक्रियता को लेकर कई बार तनाव की स्थिति बनी थी। लेकिन हालिया बयानों से संकेत मिल रहे हैं कि काठमांडू और नई दिल्ली दोनों ही पुराने विवादों को पीछे छोड़कर व्यावहारिक सहयोग को प्राथमिकता देना चाहते हैं।
नेपाल के विदेश मंत्री ने कहा कि दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंध बेहद मजबूत हैं और भविष्य की साझेदारी इन्हीं आधारों पर आगे बढ़ेगी।
क्यों महत्वपूर्ण है यह दौरा?
भारत-नेपाल संबंधों में नई सकारात्मक शुरुआत का संकेत।
व्यापार और निवेश सहयोग बढ़ाने पर जोर।
ऊर्जा और जल संसाधन परियोजनाओं पर चर्चा।
सीमा पार कनेक्टिविटी और बुनियादी ढांचा विकास पर फोकस।
क्षेत्रीय सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने की कोशिश।
बालेन शाह की राजनीति और बदलते संकेत
नेपाल की राजनीति में हाल के वर्षों में राष्ट्रवादी और भारत को लेकर आलोचनात्मक स्वर भी सुनाई देते रहे हैं। ऐसे माहौल में नेपाल के शीर्ष नेतृत्व की ओर से भारत को "सबसे अहम रणनीतिक साझेदार" बताना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली की प्रक्रिया को बल मिल सकता है।
चीन फैक्टर भी अहम
विशेषज्ञों का मानना है कि दक्षिण एशिया में बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच भारत और नेपाल दोनों अपने संबंधों को नए सिरे से मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। नेपाल की विदेश नीति में संतुलन बनाए रखने की रणनीति के बीच भारत के साथ सहयोग बढ़ाना काठमांडू की प्राथमिकताओं में शामिल दिखाई दे रहा है।
संदेश साफ है
नेपाल के विदेश मंत्री का "हम पुरानी बातों का बोझ नहीं उठाते" वाला बयान केवल एक कूटनीतिक टिप्पणी नहीं, बल्कि भारत-नेपाल संबंधों में नए अध्याय का संकेत माना जा रहा है। अब निगाहें इस बात पर होंगी कि दोनों देशों के बीच हुई चर्चाएं जमीन पर कितनी तेजी से परिणाम देती हैं।

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