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तेलंगाना में MD ड्रग्स फैक्ट्री का भंडाफोड़, 20 करोड़ से ज्यादा का नशा नेटवर्क बेनकाबMD drugs factory busted in Telangana, drug network worth over Rs 20 crore exposed

 

महाराष्ट्र पुलिस की बड़ी कार्रवाई, अंतरराज्यीय ड्रग्स सिंडिकेट पर कसा शिकंजा

हैदराबाद/मुंबई।

देश में युवाओं को नशे की दलदल में धकेलने वाले ड्रग्स माफिया के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए मीरा-भाईंदर वसई-विरार (MBVV) पुलिस की क्राइम ब्रांच ने तेलंगाना के संगारेड्डी जिले में चल रही एक अवैध एमडी (मेफेड्रोन) ड्रग्स फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया है। इस कार्रवाई में करोड़ों रुपये का नशीला पदार्थ, रसायन और उपकरण जब्त किए गए हैं।


पुलिस के अनुसार फैक्ट्री से 6.22 करोड़ रुपये का माल बरामद हुआ है, जबकि इस पूरे मामले में अब तक की कुल बरामदगी 20.72 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। जांच एजेंसियां इसे हाल के समय की बड़ी ड्रग्स विरोधी कार्रवाई मान रही हैं।

फक्ट्री में बन रहा था मौत का कारोबार

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि संगारेड्डी जिले में गुप्त रूप से संचालित इस फैक्ट्री में मेफेड्रोन जैसे सिंथेटिक ड्रग्स का उत्पादन किया जा रहा था। तैयार माल को विभिन्न राज्यों में सप्लाई करने की योजना थी।

पुलिस को सूचना मिली थी कि एक संगठित गिरोह बड़े पैमाने पर ड्रग्स निर्माण और तस्करी में शामिल है। इसके बाद कई दिनों तक निगरानी और तकनीकी जांच के बाद छापेमारी की गई।

युवाओं को बना रहे थे निशाना

जांच अधिकारियों का कहना है कि सिंथेटिक ड्रग्स का नेटवर्क तेजी से फैल रहा है और इसके निशाने पर सबसे अधिक युवा वर्ग है। मेफेड्रोन जैसे नशीले पदार्थों की मांग महानगरों और पार्टी सर्किट में लगातार बढ़ रही है, जिसका फायदा उठाकर अपराधी गिरोह करोड़ों का अवैध कारोबार चला रहे हैं।

क राज्यों तक फैला नेटवर्क

पुलिस को आशंका है कि इस ड्रग्स नेटवर्क के तार महाराष्ट्र, तेलंगाना, कर्नाटक और अन्य राज्यों तक फैले हो सकते हैं। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर सप्लाई चैन, फंडिंग और अन्य सहयोगियों की जानकारी जुटाई जा रही है।

नशा माफिया पर बड़ा प्रहार

इस कार्रवाई को ड्रग्स माफिया के खिलाफ बड़ी सफलता माना जा रहा है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस अवैध कारोबार में और कौन-कौन शामिल था तथा इसके पीछे कोई बड़ा अंतरराष्ट्रीय या अंडरवर्ल्ड नेटवर्क तो सक्रिय नहीं था।

तल्ख टिप्पणी

देश का युवा रोजगार और शिक्षा की तलाश में भटक रहा है, जबकि नशा माफिया करोड़ों रुपये का जहर तैयार कर नई पीढ़ी को बर्बादी की ओर धकेल रहे हैं। सवाल यह है कि आखिर इतनी बड़ी ड्रग्स फैक्ट्रियां महीनों तक चलती कैसे रहती हैं? क्या स्थानीय तंत्र को इसकी भनक नहीं लगती, या फिर कहीं न कहीं संरक्षण की कोई अदृश्य दीवार खड़ी रहती है?

20 करोड़ से अधिक के इस ड्रग्स नेटवर्क का खुलासा केवल एक फैक्ट्री का भंडाफोड़ नहीं, बल्कि उस काले कारोबार की झलक है जो देश के भविष्य को निगलने की कोशिश कर रहा है।

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