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किशाऊ बांध विवाद खत्म, हिमाचल को बड़ी राहत: बिजली परियोजना का खर्च उठाएंगे हरियाणा, दिल्ली और राजस्थानKishau Dam dispute ends, big relief for Himachal: Haryana, Delhi and Rajasthan to bear the cost of power project

 

हिमाचल प्रदेश और पड़ोसी राज्यों के बीच लंबे समय से अटकी किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना को लेकर बड़ा समाधान निकल आया है। केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में इस महत्वाकांक्षी परियोजना के बिजली घटक (पावर कंपोनेंट) की लागत को लेकर सहमति बन गई है। अब हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान बिजली उत्पादन से मिलने वाले लाभ के अनुपात में इस हिस्से का खर्च वहन करेंगे।


बैठक में तय किया गया कि हिमाचल प्रदेश पर बिजली उत्पादन से जुड़ी लागत का अतिरिक्त बोझ नहीं डाला जाएगा। इससे राज्य सरकार को बड़ी वित्तीय राहत मिलेगी और वर्षों से लंबित परियोजना के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है।

किशाऊ बांध परियोजना Kishau Dam यमुना नदी पर प्रस्तावित एक बहुउद्देशीय योजना है, जिसका उद्देश्य जल भंडारण, पेयजल आपूर्ति, सिंचाई और बिजली उत्पादन को बढ़ावा देना है। परियोजना से दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश सहित कई राज्यों को लाभ मिलने की उम्मीद है।

सूत्रों के अनुसार बैठक में इस बात पर सहमति बनी कि जिन राज्यों को बिजली का प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा, वे ही बिजली उत्पादन से जुड़े खर्च का वहन करेंगे। इससे परियोजना की वित्तीय संरचना को लेकर बनी हुई असहमति समाप्त हो गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि किशाऊ बांध के निर्माण से यमुना बेसिन में जल प्रबंधन बेहतर होगा, सिंचाई के लिए अतिरिक्त पानी उपलब्ध होगा और क्षेत्र में ऊर्जा उत्पादन क्षमता भी बढ़ेगी। परियोजना के शुरू होने से हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है।

केंद्र सरकार अब संबंधित राज्यों और एजेंसियों के साथ अंतिम औपचारिकताओं को पूरा कर परियोजना को तेजी से आगे बढ़ाने की तैयारी में है। वर्षों से राजनीतिक और वित्तीय विवादों में फंसी यह परियोजना अब जमीन पर उतरने के करीब पहुंच गई है।

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