जबलपुर/छिंदवाड़ा। चर्चित छिंदवाड़ा सिरप कांड मामले में आरोपी डॉक्टर को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। Madhya Pradesh High Court ने मामले की सुनवाई के दौरान आरोपी पक्ष की दलीलों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया और जांच एजेंसियों की कार्रवाई पर फिलहाल कोई राहत देने से मना कर दिया
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मामला कथित रूप से बच्चों और मरीजों को वितरित किए गए सिरप से जुड़ी अनियमितताओं और स्वास्थ्य संबंधी गंभीर आरोपों से जुड़ा है। जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर संबंधित डॉक्टर और अन्य आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी, जिसके बाद आरोपी पक्ष ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
सुनवाई के दौरान आरोपी डॉक्टर की ओर से विभिन्न कानूनी आधारों पर राहत की मांग की गई, लेकिन अदालत ने उपलब्ध रिकॉर्ड और जांच से जुड़े दस्तावेजों का अवलोकन करने के बाद इन दलीलों को पर्याप्त नहीं माना। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच प्रक्रिया में हस्तक्षेप का कोई आधार फिलहाल नजर नहीं आता।
सूत्रों के अनुसार, अदालत ने यह भी माना कि प्रथम दृष्टया जांच एजेंसियों द्वारा एकत्र किए गए दस्तावेज और साक्ष्य मामले की आगे की जांच को उचित ठहराते हैं। ऐसे में आरोपी को तत्काल राहत देने का प्रश्न नहीं उठता।
छिंदवाड़ा सिरप कांड प्रदेश के चर्चित मामलों में शामिल रहा है, जिसमें दवाओं की गुणवत्ता, आपूर्ति और मरीजों के स्वास्थ्य से जुड़े गंभीर सवाल उठे थे। मामले की जांच अभी भी जारी है और संबंधित एजेंसियां पूरे नेटवर्क की पड़ताल कर रही हैं।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि हाईकोर्ट के इस रुख से जांच एजेंसियों को बल मिलेगा और मामले में आगे की कार्रवाई तेज हो सकती है। वहीं आरोपी पक्ष के पास अब उच्च न्यायिक मंच पर जाने का विकल्प खुला हुआ है।
फिलहाल अदालत के इस फैसले को जांच एजेंसियों के लिए बड़ी सफलता और आरोपी पक्ष के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

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