अमेरिका और इजराइल के बीच दशकों पुराने रणनीतिक रिश्तों के बावजूद दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच मतभेदों की खबरें एक बार फिर सुर्खियों में हैं। ताजा रिपोर्टों में दावा किया गया है कि इजराइल की खुफिया एजेंसी मोसाद अमेरिका में सक्रिय रूप से सूचनाएं जुटा रही है, क्योंकि कुछ मुद्दों पर अमेरिकी राष्ट्रपति और इजराइली प्रधानमंत्री की सोच में अंतर दिखाई दे रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार ट्रंप प्रशासन ऐसे कदमों पर विचार कर रहा है जो नेतन्याहू सरकार की प्राथमिकताओं से पूरी तरह मेल नहीं खाते। इसी कारण इजराइल की ओर से अमेरिकी राजनीतिक और कूटनीतिक हलकों की गतिविधियों पर करीबी नजर रखी जा रही है, ताकि जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक रणनीति यानी "प्लान-बी" तैयार किया जा सके।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह कोई नया घटनाक्रम नहीं है। अतीत में भी अमेरिका और इजराइल के संबंध बेहद मजबूत होने के बावजूद जासूसी और खुफिया गतिविधियों को लेकर विवाद सामने आते रहे हैं। दोनों देश करीबी सहयोगी हैं, लेकिन राष्ट्रीय हितों के टकराव की स्थिति में खुफिया एजेंसियां अपने-अपने देशों के लिए सूचनाएं जुटाने का प्रयास करती रही हैं।
मध्य पूर्व की मौजूदा परिस्थितियों, ईरान को लेकर नीतियों और क्षेत्रीय सुरक्षा के सवालों ने दोनों नेताओं के बीच रणनीतिक मतभेदों की अटकलों को और हवा दी है। माना जा रहा है कि यदि वाशिंगटन और तेहरान के बीच किसी प्रकार की कूटनीतिक प्रगति होती है, तो उसका असर इजराइल की सुरक्षा चिंताओं पर पड़ सकता है।
क्या हैं प्रमुख संकेत?
ट्रंप प्रशासन की कुछ नीतियों से इजराइल की असहमति की चर्चा।
अमेरिकी सत्ता प्रतिष्ठान की गतिविधियों पर करीबी निगरानी के दावे।
ईरान से जुड़े मुद्दों पर संभावित रणनीतिक मतभेद।
"प्लान-बी" तैयार करने के लिए खुफिया सूचनाएं जुटाने की बात।
अमेरिका-इजराइल संबंधों में सार्वजनिक समर्थन के बावजूद पर्दे के पीछे तनाव की अटकलें।
हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और न ही अमेरिकी या इजराइली सरकार की ओर से ऐसी रिपोर्टों पर कोई आधिकारिक टिप्पणी सामने आई है। लेकिन यदि ये दावे सही साबित होते हैं, तो यह संकेत होगा कि मध्य पूर्व की बदलती राजनीति और ईरान से जुड़े मुद्दों पर दोनों देशों के बीच पर्दे के पीछे गंभीर रणनीतिक मतभेद मौजूद हैं।

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