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तीसरी सीट की जंग से नामांकन विवाद तक, मध्य प्रदेश में कैसे बदल गया राज्यसभा चुनाव का पूरा खेलFrom the battle for the third seat to the nomination dispute, how the Rajya Sabha elections in Madhya Pradesh changed completely

 

भोपाल। मध्य प्रदेश की तीन राज्यसभा सीटों के लिए होने वाला चुनाव मतदान से पहले ही जबरदस्त राजनीतिक और कानूनी विवाद में बदल गया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा तीसरे उम्मीदवार को मैदान में उतारने के बाद मुकाबला रोचक हो गया था, लेकिन कांग्रेस उम्मीदवार Meenakshi Natarajan का नामांकन खारिज होने से पूरा समीकरण बदल गया। 


भाजपा ने अपनी संख्या शक्ति के दम पर दो सीटें लगभग सुनिश्चित मानते हुए तीसरी सीट के लिए भी दांव खेला। इसके बाद कांग्रेस ने मुकाबले को दिलचस्प बनाने के लिए मीनाक्षी नटराजन को उम्मीदवार बनाया था। हालांकि जांच के दौरान उनके नामांकन पत्र पर आपत्ति दर्ज हुई और रिटर्निंग ऑफिसर ने इसे निरस्त कर दिया। भाजपा का आरोप था कि उम्मीदवार ने अपने शपथपत्र में एक कानूनी प्रकरण की जानकारी नहीं दी थी। 

कांग्रेस ने इस कार्रवाई को राजनीतिक साजिश बताते हुए पहले निर्वाचन आयोग और फिर सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। पार्टी का कहना है कि नामांकन रद्द करने का फैसला अनुचित और लोकतांत्रिक परंपराओं के विपरीत है। 

राजनीतिक जानकारों के अनुसार, यदि कांग्रेस उम्मीदवार का नामांकन बहाल नहीं होता है तो तीसरी सीट पर भाजपा की राह काफी आसान हो सकती है। यही कारण है कि जो चुनाव पहले केवल संख्या बल का खेल माना जा रहा था, वह अब कानूनी और राजनीतिक लड़ाई का केंद्र बन गया है। 

इस विवाद ने राज्यसभा चुनाव को राष्ट्रीय स्तर की चर्चा में ला दिया है। अब सभी की नजरें सर्वोच्च न्यायालय और निर्वाचन आयोग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं, क्योंकि उसका सीधा असर मध्य प्रदेश की तीसरी राज्यसभा सीट के नतीजे पर पड़ सकता है।

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