कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री D. K. Shivakumar ने पद संभालते ही उस समस्या पर फोकस किया है, जिसके लिए Bengaluru की पहचान अक्सर ट्रैफिक जाम, टूटी सड़कों और गड्ढों वाले शहर के रूप में होती रही है।
मुख्यमंत्री बनने के बाद अपनी पहली कैबिनेट बैठकों में शिवकुमार सरकार ने बेंगलुरु की सड़कों के सुधार के लिए 2,000 करोड़ रुपये के विशेष पैकेज को मंजूरी दी है। यह राशि ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी और बेंगलुरु डेवलपमेंट अथॉरिटी के तहत सड़क बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने पर खर्च की जाएगी।
सड़कों और ट्रैफिक पर पहला फोकस
आईटी हब होने के बावजूद बेंगलुरु वर्षों से ट्रैफिक जाम और खराब सड़कों की समस्या से जूझ रहा है। मुख्यमंत्री शिवकुमार ने संकेत दिए हैं कि उनकी सरकार की प्राथमिकता राजधानी की आधारभूत सुविधाओं को दुरुस्त करना होगी। पहली कैबिनेट बैठक में ही सड़कों के डामरीकरण और मरम्मत को शीर्ष एजेंडे में रखा गया।
सिर्फ सड़कें नहीं, ये बड़े फैसले भी
सरकार ने छात्रों के लिए राज्यभर में फ्री बस पास योजना की घोषणा की है, जिससे स्कूल से लेकर स्नातकोत्तर स्तर तक के विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा। इसके साथ ही निजी रोजगार विनिमय (Private Employment Exchange) और युवा संगठनों के गठन की भी घोषणा की गई है।
इसके अलावा बेंगलुरु में संपत्ति मालिकों को राहत देने के लिए वन-टाइम सेटलमेंट योजना और भवनों के दस्तावेजीकरण से जुड़ी समस्याओं के समाधान की दिशा में भी कदम उठाए गए हैं।
राजनीतिक संदेश भी साफ
मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद शिवकुमार का पहला बड़ा प्रशासनिक संदेश यही माना जा रहा है कि उनकी सरकार बेंगलुरु के इंफ्रास्ट्रक्चर संकट को प्राथमिकता देगी। राजधानी की सड़कें, ट्रैफिक और शहरी सुविधाएं आगामी वर्षों में सरकार की सबसे बड़ी परीक्षा होंगी।
बेंगलुरु को अक्सर देश की "सिलिकॉन वैली" कहा जाता है, लेकिन अब शिवकुमार सरकार के सामने चुनौती यह है कि शहर को तकनीकी राजधानी के साथ-साथ बेहतर सड़कों और सुगम यातायात वाला महानगर भी बनाया जाए।

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