Himachal Pradesh में लागू प्रवेश कर (Entry Tax) को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। इसी बीच निहंग सिख संगठनों ने सरकार के खिलाफ अनोखे अंदाज में मोर्चा खोल दिया है। किरतपुर-मनाली राष्ट्रीय राजमार्ग पर निहंग सिंहों ने 'खालसा टैक्स' अभियान चलाकर हिमाचल सरकार के फैसले का विरोध दर्ज कराया।
जानकारी के अनुसार, Baba Achar Singh Mahakal के नेतृत्व में गड़ा मोरा टोल प्लाजा पर यह प्रतीकात्मक अभियान चलाया गया। इस दौरान हिमाचल प्रदेश नंबर की गाड़ियों को रोककर चालकों से स्वैच्छिक चंदे के रूप में राशि ली गई, जिसे निहंग संगठनों ने 'खालसा टैक्स' का नाम दिया।
निहंग नेताओं का कहना है कि हिमाचल सरकार द्वारा लगाए गए प्रवेश कर से पंजाब और अन्य राज्यों से आने-जाने वाले लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। उनका आरोप है कि सरकार का यह फैसला आम जनता और व्यापारिक गतिविधियों को प्रभावित करेगा।
विरोध प्रदर्शन के दौरान निहंग संगठनों ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार की जबरन वसूली नहीं, बल्कि सरकार का ध्यान इस मुद्दे की ओर आकर्षित करना है। उन्होंने कहा कि यह अभियान पूरी तरह प्रतीकात्मक है और इसका मकसद मुख्यमंत्री Sukhvinder Singh Sukhu के नेतृत्व वाली सरकार पर प्रवेश कर वापस लेने का दबाव बनाना है।
इस घटनाक्रम ने हिमाचल और पंजाब की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। विपक्षी दल भी एंट्री टैक्स के मुद्दे पर सरकार को घेर रहे हैं, जबकि सरकार का तर्क है कि यह कर राज्य के राजस्व और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए आवश्यक है।
अब देखना होगा कि बढ़ते विरोध और राजनीतिक दबाव के बीच सुक्खू सरकार इस फैसले पर कायम रहती है या प्रवेश कर को लेकर कोई नई घोषणा करती है।

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