अंतरराष्ट्रीय बाजार में उछला क्रूड, आम आदमी की जेब पर बढ़ सकता है बोझ
नई दिल्ली।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तीसरे दिन तेजी दर्ज की गई है। जून माह में अब तक क्रूड ऑयल करीब 9 प्रतिशत महंगा हो चुका है। हालांकि राहत की बात यह है कि भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार नौवें दिन भी कोई बदलाव नहीं किया गया है। लेकिन ऊर्जा बाजार के जानकारों का मानना है कि यदि वैश्विक स्तर पर यही स्थिति बनी रही तो आने वाले दिनों में तेल कंपनियों पर कीमतें बढ़ाने का दबाव बढ़ सकता है।
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और वैश्विक आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड और डब्ल्यूटीआई क्रूड दोनों में तेजी देखने को मिल रही है। तेल उत्पादक देशों की नीतियां भी बाजार को प्रभावित कर रही हैं।
सरकार के सामने नई चुनौती
लोकसभा चुनावों के बाद पहले ही महंगाई को लेकर विपक्ष सरकार पर हमलावर है। ऐसे में यदि पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ते हैं तो इसका सीधा असर परिवहन लागत और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर पड़ेगा।
आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि पेट्रोल और डीजल केवल ईंधन नहीं हैं, बल्कि पूरी अर्थव्यवस्था की धुरी हैं। इनके महंगे होने से सब्जियों, खाद्यान्न, निर्माण सामग्री और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतें भी बढ़ सकती हैं।
तेल कंपनियां फिलहाल संभाल रही मोर्चा
सरकारी तेल कंपनियां फिलहाल अंतरराष्ट्रीय बाजार की बढ़ी कीमतों का पूरा बोझ उपभोक्ताओं पर नहीं डाल रही हैं। लेकिन यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं तो कीमतों में संशोधन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
आम आदमी की बढ़ी चिंता
देश में पहले से ही रसोई, शिक्षा और स्वास्थ्य पर बढ़ते खर्च के बीच ईंधन कीमतों में संभावित बढ़ोतरी आम लोगों की चिंता बढ़ा रही है। वाहन चालकों और परिवहन क्षेत्र से जुड़े लोगों की नजर अब सरकार और तेल कंपनियों के अगले कदम पर टिकी है।
बड़ा सवाल
क्या सरकार महंगाई को देखते हुए पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर रख पाएगी, या फिर अंतरराष्ट्रीय बाजार की आग आखिरकार भारतीय उपभोक्ताओं की जेब तक पहुंचेगी?
फिलहाल पंपों पर कीमतें स्थिर हैं, लेकिन वैश्विक बाजार के संकेत बता रहे हैं कि आने वाले दिन ईंधन बाजार के लिए निर्णायक साबित हो सकते हैं।

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