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भोपाल डीईओ कार्यालय में 1.55 करोड़ का घोटाला, संयुक्त संचालक ने जारी किया नोटिस1.55 crore scam in Bhopal DEO office, joint director issues notice

बिना हस्ताक्षर पास हुए बिल, खेल निधि के हिसाब में बड़ी गड़बड़ी; कई पुराने मामलों से मिलते हैं तार



भोपाल के जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) कार्यालय में करीब 1 करोड़ 55 लाख 43 हजार 356 रुपए की वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। जानकारी के अनुसार अप्रैल 2023 से दिसंबर 2025 के बीच खेल निधि के खर्चों की जांच में यह गड़बड़ी उजागर हुई है।


मामले की गंभीरता को देखते हुए संयुक्त संचालक अरविंद चौरंगे ने नोटिस जारी कर डीईओ कार्यालय से 15 दिन के भीतर जवाब मांगा है। जांच में कैश बुक-वाउचर रजिस्टर में दर्ज राशि और उपलब्ध दस्तावेजों में बड़ा अंतर पाया गया है।


सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि कुछ बिलों का भुगतान कथित रूप से सक्षम अधिकारी की स्वीकृति और हस्ताक्षर के बिना ही कर दिया गया। हालांकि संबंधित बिलों पर हस्ताक्षर को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं, जिसके चलते पूरे मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है।


जांच दल के अनुसार खेल निधि के खातों में दर्ज व्यय और प्रस्तुत दस्तावेजों का मिलान करने पर करोड़ों रुपये के भुगतान का स्पष्ट हिसाब नहीं मिला। इसे वित्तीय नियमों का गंभीर उल्लंघन माना जा रहा है।


यह पहला मामला नहीं है जब शिक्षा विभाग वित्तीय अनियमितताओं को लेकर चर्चा में आया हो। इससे पहले जबलपुर डीईओ कार्यालय में 2019 के कथित तीन करोड़ रुपये के क्रीड़ा निधि घोटाले, इंदौर डीईओ कार्यालय में 2017 के वेतन-बिल फर्जीवाड़े और भोपाल स्थित डीपीआई में 2021 के फर्जी बिल प्रकरण जैसे मामले भी सामने आ चुके हैं।


अब सवाल यह उठ रहा है कि यदि इतनी बड़ी राशि के भुगतान में अनियमितता हुई तो जिम्मेदारी किसकी है? क्या आंतरिक ऑडिट व्यवस्था विफल रही या फिर जानबूझकर नियमों को दरकिनार किया गया? जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर साफ हो सकेगी।


फिलहाल शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की नजर इस मामले पर है और जांच रिपोर्ट आने के बाद संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।

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