नई दिल्ली।
देश में सोने की लगातार बढ़ती कीमतों और ऊंची आयात शुल्क दरों के बीच सोने की तस्करी एक बार फिर तेजी से बढ़ती दिखाई दे रही है। जांच एजेंसियों और बाजार विशेषज्ञों के अनुसार तस्करी के जरिए लाया गया सोना वैध बाजार की तुलना में प्रति किलो 8 से 10 लाख रुपये तक सस्ता पड़ रहा है, जिससे अवैध कारोबारियों को भारी मुनाफा हो रहा है।
जानकारों के मुताबिक खाड़ी देशों से आने वाले यात्रियों के माध्यम से सोने की तस्करी के सबसे अधिक मामले सामने आ रहे हैं। इसके अलावा नेपाल और बांग्लादेश की सीमाएं भी तस्करों के लिए प्रमुख मार्ग बनती जा रही हैं। सीमावर्ती क्षेत्रों में छोटी खेपों के जरिए सोना भारत में पहुंचाया जा रहा है, जिससे पकड़ में आने का जोखिम कम हो जाता है
विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार और भारतीय बाजार के बीच कीमतों का अंतर तथा आयात शुल्क की ऊंची दरें तस्करी को बढ़ावा देने वाले प्रमुख कारण हैं। जब कानूनी आयात महंगा हो जाता है, तब अवैध नेटवर्क सक्रिय होकर कीमतों के अंतर का फायदा उठाते हैं।
हाल के महीनों में हवाई अड्डों और सीमा क्षेत्रों पर सीमा शुल्क विभाग तथा अन्य एजेंसियों ने कई बड़ी कार्रवाई करते हुए करोड़ों रुपये मूल्य का सोना जब्त किया है। अधिकांश मामलों में सोना यात्रियों के सामान, कपड़ों, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और अन्य वस्तुओं में छिपाकर लाया जा रहा था।
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यदि सोने की कीमतों में तेजी और शुल्क संरचना में बड़ा बदलाव नहीं हुआ तो आने वाले समय में तस्करी की चुनौतियां और बढ़ सकती हैं। इससे सरकार के राजस्व को नुकसान पहुंचने के साथ-साथ वैध कारोबार भी प्रभावित होता है।
भारत दुनिया के सबसे बड़े स्वर्ण उपभोक्ता देशों में शामिल है। ऐसे में सोने की मांग और कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर तस्करी के नेटवर्क पर भी दिखाई दे रहा है, जिसे रोकना सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।

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