मुंबई: देश में चलन में मौजूद नकदी में तेज बढ़ोतरी ने अर्थशास्त्रियों की चिंता बढ़ा दी है। अप्रैल के पहले पंद्रह दिनों में ही बाजार में मौजूद नकदी 610 अरब रुपये से ज्यादा बढ़ गई। इसके साथ कुल नकदी का स्तर बढ़कर रिकॉर्ड 42.3 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। यह बढ़ोतरी पिछले साल की तुलना में करीब 11.8 प्रतिशत अधिक बताई जा रही है। नोटबंदी के बाद वर्ष 2017 की शुरुआत से अब तक यह सबसे बड़ी तेजी मानी जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों से नकदी की मांग लगातार बढ़ रही थी और अब उसमें और तेजी दिखाई दे रही है। ग्रामीण इलाकों में खर्च और मांग बढ़ने को भी इसकी बड़ी वजह माना जा रहा है। अर्थशास्त्रियों के मुताबिक पहले सकल घरेलू उत्पादन की तुलना में नकदी की मांग अपेक्षाकृत कम थी, लेकिन अब अचानक तेजी से बढ़ोतरी देखने को मिल रही है।
बैंकिंग व्यवस्था पर बढ़ सकता है दबाव
अगर नकदी की यह रफ्तार आगे भी जारी रही तो बैंकिंग व्यवस्था में उपलब्ध अतिरिक्त धन पर दबाव बढ़ सकता है। केंद्रीय बैंक लंबे समय से आर्थिक गतिविधियों को गति देने के लिए व्यवस्था में अतिरिक्त धन बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। अनुमान लगाया जा रहा है कि चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में अतिरिक्त धन जमा का करीब एक प्रतिशत रह सकता है, जबकि दूसरी छमाही में यह घटकर आधा प्रतिशत तक पहुंच सकता है।
महंगाई और चुनावी असर भी वजह
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि महंगाई बढ़ने, ग्रामीण मांग में तेजी और राज्यों के चुनावी खर्च का असर भी नकदी की मांग को ऊपर बनाए रख सकता है। यदि ऐसा होता है तो बैंकिंग व्यवस्था में उपलब्ध अतिरिक्त धन का संतुलन अनुमानित सीमा के निचले स्तर तक पहुंच सकता है।
केंद्रीय बैंक पहले ही कह चुका है कि जमा राशि के सीमित दायरे में अतिरिक्त धन बनाए रखना जरूरी है, ताकि बाजार में ब्याज दरों और नीतिगत दरों के बीच संतुलन बना रहे। विशेषज्ञों का कहना है कि अभी केंद्रीय बैंक की ओर से डाली जा रही राशि व्यवस्था को सहारा दे रही है, लेकिन बाजार में बढ़ती नकदी आगे चलकर इस संतुलन को कमजोर कर सकती है।

Post a Comment