शैलेंद्र सिंह कुशवाहा उज्जैन
उज्जैन रोड पर ग्राम बजरंग पालिया स्थित आयडियल सांवरिया धाम कालोनी को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। आरोप है कि बिना वैधानिक मंजूरी और बिना रेरा पंजीकरण के यहां धड़ल्ले से प्लॉट बेचे जा रहे हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि प्लॉट बेचने वाली मार्केटिंग कंपनी खुद यह तक स्पष्ट नहीं कर पा रही कि कालोनी को रेरा की मंजूरी मिली है या नहीं।
सूत्रों के मुताबिक करीब 600 प्लॉट वाली इस कालोनी में लोगों को सुनहरे सपने दिखाकर जमीन बेची जा रही है। दावा किया जा रहा है कि यहां 2600 से 3000 रुपये प्रति वर्ग फीट तक की कीमत वसूली जा रही है, जबकि कालोनी के पास न रेरा स्वीकृति है, न वैध निर्माण अनुमति और न ही आवश्यक वैधानिक प्रक्रिया पूरी हुई है।
“प्लॉट बेच रहे हैं, मंजूरी की जानकारी नहीं”
मामले में सबसे हैरान करने वाला बयान कंपनी से जुड़े अधिकारी विनोद अहिरवार का बताया जा रहा है। उन्होंने कथित तौर पर कहा कि उन्हें यह जानकारी नहीं है कि कालोनी को रेरा की मंजूरी मिली है या नहीं, वे सिर्फ प्लॉट बेच रहे हैं।
यही बयान अब पूरे खेल पर सबसे बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। जब बेचने वालों को ही वैधानिक स्थिति की जानकारी नहीं, तब खरीदारों का भविष्य कितना सुरक्षित है, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।
नक्शा नहीं, निर्माण नहीं, फिर किस बात के सपने?
जानकारों का कहना है कि यदि किसी कालोनी को वैधानिक मंजूरी नहीं मिली हो तो वहां निर्माण अनुमति मिलना मुश्किल हो सकता है। ऐसे मामलों में खरीदार वर्षों तक सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटते रह जाते हैं।
आरोप है कि लोगों को यह कहकर फंसाया जा रहा है कि जल्द ही पूरी मंजूरी मिल जाएगी, जबकि अभी तक जरूरी प्रक्रियाएं पूरी नहीं हुई हैं।
आलीशान दफ्तर से चल रहा “जमीन का कारोबार”
सूत्रों के अनुसार प्रॉपविस्टा नाम की यह मार्केटिंग कंपनी एमआर-10 ब्रिज के पास आदित्य गेटवे बिल्डिंग में आलीशान कार्यालय से काम कर रही है। आरोप है कि यहां बैठकर कंपनी के अधिकारी भोले-भाले लोगों को बड़े मुनाफे और भविष्य के सपने दिखाकर प्लॉट बेच रहे हैं।
कंपनी से जुड़े अन्य नामों में रमेश पाल और आनंद धाकड़ का भी जिक्र सामने आया है। आरोप है कि ये लोग ग्राहकों को अधूरी और भ्रामक जानकारी देकर सौदे करवाने में लगे हैं।
उज्जैन रोड पर और भी कई संदिग्ध परियोजनाएं?
सूत्रों का दावा है कि यह सिर्फ एक कालोनी का मामला नहीं है। उज्जैन रोड पर कई ऐसी परियोजनाओं में भी इसी तरह प्लॉट बेचने का खेल चल रहा है, जहां वैधानिक मंजूरियों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर बिना मंजूरी के चल रही ऐसी परियोजनाओं पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? क्या जिम्मेदार विभागों की नजर इस पूरे खेल पर नहीं है या फिर सब कुछ जानते हुए भी आंखें बंद कर ली गई हैं?
सपनों का घर या जिंदगी भर की मुसीबत?
हर व्यक्ति अपने जीवनभर की कमाई से घर का सपना देखता है। लेकिन यदि बिना जांच-पड़ताल के ऐसे प्रोजेक्ट्स में पैसा लगाया गया तो यही सपना भारी आर्थिक संकट में बदल सकता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि किसी भी प्लॉट या कालोनी में निवेश करने से पहले रेरा पंजीकरण, वैधानिक मंजूरी और सरकारी दस्तावेजों की पूरी जांच जरूर कर लें।

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