नई दिल्ली ।बौद्धिक प्रतिकार
प्रेस की आजादी और अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर उठाए सवालों को भारत ने किया खारिज, कहा- भारत का लोकतंत्र मजबूत और संवैधानिक
प्रेस की आजादी और अल्पसंख्यकों के अधिकारों को लेकर नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटेन की टिप्पणी पर भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। भारत सरकार ने साफ शब्दों में कहा कि यह बयान “तथ्यों और भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था की समझ की कमी” को दर्शाता है।
दरअसल, नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटेन ने एक बयान में कहा था कि डच सरकार को भारत में प्रेस की स्वतंत्रता और अल्पसंख्यकों के अधिकारों को लेकर चिंता है। उनके इस बयान के बाद भारतीय विदेश मंत्रालय ने तीखा जवाब देते हुए कहा कि भारत एक जीवंत, बहुलतावादी और संवैधानिक लोकतंत्र है, जहां सभी नागरिकों के अधिकार कानून द्वारा संरक्षित हैं।
विदेश मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक भारत ने स्पष्ट किया कि देश में मीडिया पूरी स्वतंत्रता के साथ काम कर रहा है और न्यायपालिका से लेकर संवैधानिक संस्थाएं पूरी मजबूती से कार्य कर रही हैं। भारत ने यह भी कहा कि किसी भी देश को भारत के आंतरिक मामलों पर अधूरी जानकारी के आधार पर टिप्पणी करने से बचना चाहिए।
राजनयिक हलकों में इस बयान को भारत की मजबूत कूटनीतिक प्रतिक्रिया माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में भारत ने कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर स्पष्ट किया है कि वह विदेशी सरकारों की “चयनात्मक टिप्पणियों” को स्वीकार नहीं करेगा।
वहीं राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती रणनीतिक और आर्थिक ताकत के बीच पश्चिमी देशों की ओर से मानवाधिकार और प्रेस स्वतंत्रता जैसे मुद्दों पर बयानबाजी लगातार संवेदनशील विषय बनती जा रही है।
भारत ने दो टूक कहा है कि देश का लोकतंत्र दुनिया के सबसे मजबूत लोकतांत्रिक ढांचों में से एक है और यहां संवैधानिक संस्थाएं पूरी तरह सक्रिय और स्वतंत्र हैं।

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