Top News

ड्रग तस्करी का गढ़ बनता मध्यप्रदेश? NCRB रिपोर्ट ने खोली कानून व्यवस्था की परतेंIs Madhya Pradesh becoming a hub for drug trafficking? NCRB report exposes the layers of law and order



भोपाल ।बौद्धिक प्रतिकार

देश के 18 बड़े ड्रग तस्करी मामलों में 11 अकेले MP से, आखिर किसके संरक्षण में फल-फूल रहा नशे का नेटवर्क?

मध्यप्रदेश को “शांत प्रदेश” बताने वाली सरकार के दावों के बीच अब एक ऐसी रिपोर्ट सामने आई है जिसने प्रदेश की कानून व्यवस्था और पुलिस सिस्टम पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। NCRB की 2024 रिपोर्ट के मुताबिक ड्रग तस्करी के मामलों में मध्यप्रदेश देश में पहले नंबर पर पहुंच गया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि देशभर के बड़े ड्रग तस्करी मामलों में लगभग 60 प्रतिशत केस अकेले मध्यप्रदेश से जुड़े बताए गए हैं।

रिपोर्ट के अनुसार देश में दर्ज 18 बड़े ड्रग तस्करी मामलों में 11 केस अकेले मध्यप्रदेश के हैं। यही नहीं, संगठित अपराध के मामलों में भी प्रदेश के आंकड़े बेहद चिंताजनक बताए जा रहे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर प्रदेश में नशे का यह नेटवर्क इतना मजबूत कैसे हो गया?

सीमाओं से लेकर शहरों तक फैला नशे का जाल

प्रदेश के कई शहरों—इंदौर, भोपाल, मंदसौर, नीमच, ग्वालियर और जबलपुर—में पिछले कुछ वर्षों में MD ड्रग्स, चरस, गांजा और सिंथेटिक नशे की बड़ी खेप पकड़ी गई है। जांच एजेंसियों को आशंका है कि मध्यप्रदेश अब केवल ट्रांजिट रूट नहीं, बल्कि ड्रग नेटवर्क का सक्रिय केंद्र बनता जा रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदेश की भौगोलिक स्थिति, कई राज्यों से सीधी कनेक्टिविटी और सीमावर्ती इलाकों में कमजोर निगरानी तस्करों के लिए मददगार साबित हो रही है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि आखिर इतनी बड़ी तस्करी बिना किसी संरक्षण के कैसे संभव है?

विपक्ष का हमला- “सरकार अपराध रोकने में फेल”

रिपोर्ट सामने आने के बाद विपक्ष ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि प्रदेश में कानून व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है और नशे का कारोबार युवाओं को बर्बाद कर रहा है। विपक्ष ने आरोप लगाया कि पुलिस केवल छोटी कार्रवाई दिखाकर बड़े नेटवर्क पर पर्दा डाल रही है।

वहीं सरकार की ओर से दावा किया जा रहा है कि ड्रग्स के खिलाफ लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं और कई बड़े गिरोहों का खुलासा किया गया है। लेकिन लगातार बढ़ते आंकड़े सरकारी दावों पर सवाल खड़े कर रहे हैं।

युवाओं का भविष्य खतरे में

सबसे गंभीर चिंता यह है कि नशे का यह जाल अब स्कूल-कॉलेज तक पहुंचता दिखाई दे रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समय रहते सख्त और निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई, तो मध्यप्रदेश आने वाले वर्षों में नशे की बड़ी समस्या से जूझ सकता है।

अब जनता पूछ रही है—

क्या मध्यप्रदेश “नशा मुक्त” बनने की ओर बढ़ रहा है, या फिर ड्रग माफिया के लिए सबसे सुरक्षित प्रदेश बनता जा रहा है?

Post a Comment

Previous Post Next Post