बौद्धिक प्रतिकार। नई दिल्ली केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी Bharatmala Pariyojana के तहत लगभग 944 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया जा रहा फोरलेन कॉरिडोर तेजी से आकार ले रहा है। राष्ट्रीय राजमार्ग-753L पर बोरेगांव से शाहपुर तक लगभग 47 किलोमीटर लंबा यह मार्ग निर्माणाधीन है और परियोजना का करीब 85 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है।
यह फोरलेन कॉरिडोर मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के बीच सड़क संपर्क को नई मजबूती देगा। परियोजना पूरी होने के बाद इंदौर, खंडवा, बुरहानपुर, जलगांव और छत्रपति संभाजीनगर जैसे प्रमुख शहरों के बीच आवागमन अधिक तेज, सुरक्षित और सुगम हो जाएगा।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार यह मार्ग माल परिवहन और यात्री यातायात दोनों के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा। वर्तमान में कई स्थानों पर संकरी सड़क और बढ़ते ट्रैफिक के कारण यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है, लेकिन फोरलेन बनने के बाद यात्रा समय में कमी आएगी तथा सड़क दुर्घटनाओं की संभावना भी घटेगी।
यह क्षेत्र केला, कपास, सोयाबीन और गेहूं जैसी कृषि उपज के लिए जाना जाता है। बेहतर सड़क संपर्क मिलने से किसानों को अपनी उपज बड़े बाजारों तक पहुंचाने में आसानी होगी, वहीं परिवहन लागत में भी कमी आएगी। इससे स्थानीय व्यापार और कृषि अर्थव्यवस्था को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।
परियोजना के तहत आधुनिक सड़क ढांचा, बेहतर जंक्शन, सुरक्षित यातायात व्यवस्था और आवश्यक स्थानों पर बायपास सुविधाएं भी विकसित की जा रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कॉरिडोर भविष्य में औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के साथ क्षेत्रीय विकास का नया आधार बनेगा।
स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय से बेहतर सड़क संपर्क की मांग की जा रही थी। फोरलेन परियोजना के पूरा होने के बाद न केवल रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के बीच आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी।

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