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खौफनाक साजिश, हिंदू युवाओं को ढाल बनाकर आतंकी मंसूबों को अंजाम देने की तैयारीA terrifying conspiracy, using Hindu youth as shields to carry out terrorist plans.



उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधी दस्ते (एटीएस) की गिरफ्त में आए संदिग्ध आतंकी शाकिब से हुई पूछताछ में एक अत्यंत चौंकाने वाला और संवेदनशील खुलासा हुआ है। जाँच में यह बात सामने आई है कि सीमा पार बैठे पाकिस्तानी हैंडलर्स ने भारत में दहशत फैलाने के लिए अपनी पारंपरिक रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। एटीएस की पूछताछ में शाकिब ने बताया कि उसे अपने आकाओं से सीधे निर्देश मिले थे कि इस बार न तो शहादत का रास्ता चुनना है और न ही सुरक्षा एजेंसियों के हत्थे चढ़ना है। इसके बजाय, सुरक्षा घेरे में सेंध लगाने के लिए स्थानीय हिंदू युवकों को ढाल बनाकर आतंकी मंसूबों को अंजाम देने की योजना तैयार की गई थी।

इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड दुबई में बैठा आकिब बताया जा रहा है, जिसने सोशल मीडिया के जरिए युवाओं का ब्रेनवॉश कर उन्हें देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने के लिए उकसाया। एटीएस ने इस मामले में मेरठ के साकिब उर्फ डेविल, अरबाब, और गौतमबुद्धनगर के विकास उर्फ रौनक व लोकेश उर्फ पपला पंडित को गिरफ्तार किया है। हैरानी की बात यह है कि इन युवकों को अरबाब के जरिए जोड़ा गया था और भारी पैसों का लालच देकर देश विरोधी गतिविधियों के लिए तैयार किया गया था। पहचान छिपाने के लिए शाकिब ने विकास का कोड नेम जाहिद और लोकेश का कोड नेम सलीम रखा था।

एडीजी कानून-व्यवस्था अमिताभ यश के मुताबिक, आकिब लंबे समय से इंस्टाग्राम और टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स पर आधुनिक हथियारों के साथ अपनी तस्वीरें पोस्ट कर युवाओं को प्रभावित कर रहा था। शाकिब इस मॉड्यूल का मुख्य संचालक था, लेकिन वह रेकी के लिए लोकेश का सहारा लेता था। लोकेश के हिंदू होने का फायदा उठाकर उसे आसानी से प्रमुख धार्मिक स्थलों और संवेदनशील सैन्य प्रतिष्ठानों पर भेजा जाता था, ताकि किसी को उस पर शक न हो। इस तरह पहचान को ही सुरक्षा व्यवस्था में सेंध लगाने का हथियार बनाया गया। पूछताछ में यह भी पता चला है कि पाकिस्तानी हैंडलर्स सीधे शाकिब को गूगल लोकेशन भेजते थे। इसके बाद यह गिरोह उन जगहों पर जाकर वीडियो बनाता और वापस भेजता था, जिसके बदले उन्हें मोटी रकम दी जाती थी। इस मॉड्यूल ने उत्तर प्रदेश के कई रक्षा प्रतिष्ठानों, कैंट इलाकों और कुछ नामचीन धार्मिक नेताओं की सुरक्षा व्यवस्था की जासूसी कर ली थी। सुरक्षा एजेंसियों को अंदेशा है कि इस नेटवर्क से और भी लोग जुड़े हो सकते हैं, जिनकी तलाश में छापेमारी जारी है। फिलहाल, पकड़े गए आरोपियों के मोबाइल डेटा और फंडिंग के स्रोतों की गहराई से पड़ताल की जा रही है।

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