प्रणव बजाज
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री Mohan Yadav की दिल्ली में बढ़ती सक्रियता अब सियासी बहस का मुद्दा बनती जा रही है। पार्टी और सत्ता के गलियारों में चर्चा है कि राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में उनकी भूमिका “सीमित” होती नजर आ रही है।
सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली दौरों के बावजूद बड़े फैसलों में उनकी भागीदारी अपेक्षित नहीं दिख रही, जिससे यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या वे सिर्फ औपचारिक बैठकों तक सीमित रह गए हैं? वहीं, प्रदेश में भी प्रशासनिक फैसलों की रफ्तार पर असर पड़ने की चर्चा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बार-बार दिल्ली दौरे और स्थानीय मुद्दों से दूरी की धारणा, नेतृत्व की छवि को कमजोर कर सकती है। विपक्ष इसे “सत्ता में रहते हुए भी प्रभावहीनता” के रूप में पेश कर रहा है।
* कुल मिलाकर, दिल्ली की सियासत में सक्रियता बढ़ाने की कोशिश के बीच यह भी साफ हो रहा है कि मोहन यादव को प्रदेश और केंद्र के बीच संतुलन बनाने की बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।

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