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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बैंच में धार भोजशाला विवाद पर सुनवाई जारी है. वहीं, गुरुवार को सुनवाई के चौथे दिन सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने हिंदू पक्ष की ओर से कोर्ट के समक्ष विभिन्न तर्क रखे. अधिवक्ता ने हाईकोर्ट के बताया कि भोजशाला को मूल स्ट्रक्चर तोड़कर वहां पर तीसरा स्ट्रक्चर बनाया गया था. यहां संस्कृत श्लोकों को मिटाकर उनपर स्ट्रक्चर बनाने के भी सबूत मिले हैं, जिन्हें कोर्ट के सामने पेश किया गया है.
मंदिर तोड़कर उसपर हुआ निर्माण, संस्कृत के श्लोक मिटाए
अधिवक्ता पार्थ यादव ने बताया कि धार भोजशाला को लेकर इंदौर हाई कोर्ट में अब नियमित रूप से सुनवाई चल रही है. चौथे दिन भी हिंदू पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने एएसआई की सर्वे रिपोर्ट का हवाला दिया. भोजशाला में एएसआई सर्वे के मुताबिक परिसर के अंदर संस्कृत के श्लोक लिखे हुए थे, जिन्हें मिटाया गया और कई प्राचीन स्ट्रक्टचर को तोड़कर वहां से हटाया गया है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि वर्तमान में दिखने वाला एक स्ट्रक्चर मंदिर तोड़कर उसपर बनाया गया था.
तीसरे दिन मुगल आक्रांता खिलजी और गोरी की हुई थी चर्चा
इससे पहले सुनवाई के तीसरे दिन बुधवार को सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने कोर्ट के समक्ष मुगल आक्रांता खिलजी और गोरी का भी जिक्र किया. अधिवक्ता ने बताया कि कैसे इन सभी मुगल आक्रांताओं ने सरस्वती माता के मंदिर भोजशाला को तोड़ा था, जिसके प्रमाण भी कोर्ट के समक्ष रखे गए. कोर्ट के समक्ष प्रतिवादी क्रमांक आठ के जवाब का हवाला देते हुए कहा गया था कि वहां पर मां सरस्वती का मंदिर था और वहां पर इस संस्कृत विश्वविद्यालय भी रहा है.
हिंदू पक्ष की ओर से फिलहाल विष्णु शंकर जैन और विनय जोशी उपस्थित हुए तो वहीं अन्य पक्ष वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित हुआ, जिसमें वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद भी शामिल थे. फिलहाल इस पूरे मामले में चार याचिकाओं और एक अपील क्लब है. इसलिए इस पूरे मामले में लगातार सुनवाई हो रही है.
अब मुस्लिम पक्ष रखेगा तर्क, जारी रहेगी सुनवाई
फिलहाल विष्णु शंकर जैन द्वारा भोजशाला विवाद को लेकर हिंदू पक्ष के कई ठोस सबूत पेश किए गए हैं. वहीं, अब इस पूरे मामले में अब मुस्लिम पक्ष के तर्क और आपत्तियों को सुना जाएगा. तमाम पक्षों को सुनने और एएसआई की रिपोर्ट के आधार पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट आने वाले दिनों में इस विवाद पर फैसला सुना सकता है. देखना ये होगा कि अब मुस्लिम पक्ष इस मामले में क्या तर्क रखता है.

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