Top News

मौत पर भी मुनाफा? इंदौर में श्मशान व्यवस्था पर उठे गंभीर सवालProfit even on death? Serious questions raised about the cremation system in Indore

 


प्रणव बजाज (सम्पादकीय )

इंदौर। शहर की नगर निगम व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। इस बार मामला और भी संवेदनशील है—आरोप है कि श्मशान घाटों पर अंतिम संस्कार में इस्तेमाल होने वाली लकड़ी तक में कथित रूप से कमीशनखोरी हो रही है।

विपक्षी नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने नगर निगम को निशाने पर लेते हुए इसे “भ्रष्टाचार में नवाचार” बताया है। उनका आरोप है कि जहां एक ओर आम नागरिक अपने परिजन के निधन के । दुख में डूबा होता है, वहीं दूसरी ओर श्मशान घाटों पर आवश्यक व्यवस्थाओं—खासतौर पर चिता की लकड़ी—में भी अनियमितताएं सामने आ रही हैं।

इंदौर नगर निगम, जिसे कभी स्वच्छता के लिए देशभर में सराहा गया, अब कथित वित्तीय गड़बड़ियों को लेकर चर्चा में है। आरोपों के मुताबिक लकड़ी की दरों में पारदर्शिता नहीं है और आपूर्ति से जुड़े सिस्टम में दलाली की गुंजाइश बनी हुई है।

मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। विपक्ष ने सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी और राज्य सरकार को घेरा है। मुख्यमंत्री मोहन यादव से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की जा रही है।

हालांकि अभी तक नगर निगम या संबंधित अधिकारियों की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यदि ये आरोप सही साबित होते हैं, तो यह न सिर्फ प्रशासनिक विफलता मानी जाएगी, बल्कि मानवीय संवेदनाओं पर भी गहरी चोट होगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि श्मशान जैसी संवेदनशील जगहों पर पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है, ताकि दुःख की घड़ी में आम लोगों का शोषण न हो।

अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले की जांच कर ठोस कार्रवाई करता है या यह मुद्दा भी राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रह जाता है।

Post a Comment

Previous Post Next Post